फर्जी वीजा और विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया; तीन गिरफ्तार

फर्जी वीजा और विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया; तीन गिरफ्तार

फर्जी वीजा और विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया; तीन गिरफ्तार
Modified Date: April 29, 2026 / 07:20 pm IST
Published Date: April 29, 2026 7:20 pm IST

नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (भाषा) दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय फर्जी वीजा और विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है जिसने रूस, तुर्किये और अजरबैजान जैसे देशों में मोटी तनख्वाह पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर सैकड़ों लोगों को ठगा है।

पुलिस के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।

आरोपियों की पहचान बिहार के सिवान निवासी सलाउद्दीन मंसूरी उर्फ हैदर खान (38), उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी मोहम्मद शहजाद (34) और कुशीनगर निवासी कौसर (32) के रूप में हुई है।

पुलिस ने बताया कि यह गिरोह रूस, तुर्किये और अजरबैजान जैसे देशों में अच्छी तनख्वाह पर नौकरियां दिलाने के बहाने पीड़ितों को जाल में फंसाता था और जाली वीजा दस्तावेज जारी करके उन्हें धोखा देता था।

पुलिस ने बताया कि फर्जी वीजा गिरोह को लेकर खुफिया जानकारी मिली थी जिसके बाद इस गिरोह का भंडाफोड़ किया गया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘पीतमपुरा के नेताजी सुभाष प्लेस के पास एक समन्वित छापेमारी की गई, जिसमें तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।’

जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ‘सबा एंटरप्राइजेज’ नामक एक फर्जी कंपनी के माध्यम से काम करता था और भर्ती एजेंट होने का दिखावा करता था। पुलिस ने बताया कि मंसूरी फर्जी मानव संसाधन (एचआर) प्रबंधक बनकर पीड़ितों का विश्वास जीतता था।

आरोपियों ने विदेश में नौकरी का विज्ञापन करने के लिए सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल किया। पीड़ितों से उनके पासपोर्ट भेजने के लिए कहा गया, जिन्हें स्कैन करके नकली मुहरों वाले जाली वीजा बनाए गए।

अधिकारी ने कहा,“उन्होंने फर्जी सत्यापन लिंक और अस्थायी या रद्द किए गए हवाई टिकट भी साझा किए ताकि दस्तावेज़ असली लगें। पीड़ितों को धोखाधड़ी का पता तब चला जब उन्होंने अपने मूल पासपोर्ट पर वीजा की मुहर नहीं दिखी और उनके टिकट अमान्य मिले।”

पुलिस ने बताया कि आरोपी पुलिस की पकड़ से बचने के लिए कोलकाता, नोएडा, गोरखपुर और पटना जैसे शहरों में अक्सर अपना ठिकाना बदलते रहते थे।

पीड़ितों के पांच मूल पासपोर्ट व सात मोबाइल फोन बरामद किए है जिनमें फर्जी वीजा डेटा, नौकरी के पत्र और ई-टिकट थे। इसी के साथ नकदी और एक फर्जी आधार कार्ड समेत कई पहचान पत्र और डेबिट कार्ड भी बरामद किए गए।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को रोहिणी की अदालत में पेश किया गया जिसने उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया।

पुलिस ने बताया कि अन्य पीड़ितों की पहचान करने, वित्तीय लेन-देन का पता लगाने और फरार सरगना को पकड़ने के लिए आगे की जांच जारी है।

भाषा नोमान

नोमान नरेश

नरेश


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