परिसर सील मामला: जूट अनुसंधान संगठन की केंद्र सरकार और कोलकाता बंदरगाह के साथ बातचीत जारी
परिसर सील मामला: जूट अनुसंधान संगठन की केंद्र सरकार और कोलकाता बंदरगाह के साथ बातचीत जारी
कोलकाता, छह जून (भाषा) पश्चिम बंगाल में जूट उद्योग से संबंधित एक शोध संगठन कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ताराताला परिसर को सील किए जाने से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार और कोलकाता बंदरगाह के अधिकारियों से बातचीत कर रहा है। यह जानकारी शनिवार को एक अधिकारी ने दी।
श्याम प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह की लगभग 15 बीघा भूमि पर फैले ‘इंडियन जूट इंडस्ट्रीज रिसर्च एसोसिएशन’ (आईजेआरए) के 17 ताराताला रोड स्थित परिसर को 15 मई को उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सील कर दिया गया था।
उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि 2007 में पट्टे की अवधि समाप्त होने के बाद संस्थान का जमीन पर अनधिकृत कब्जा था।
अदालत ने बेदखली की कार्यवाही की भी अनुमति दे दी थी।
एसोसिएशन के ‘बोर्ड ऑफ काउंसिल’ के अध्यक्ष डीसी बाहेती ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हम परिसर को सील किए जाने के संबंध में वस्त्र मंत्रालय और बंदरगाह ट्रस्ट के संपर्क में हैं। हमें निकट भविष्य में समाधान की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब संभावित समझौते पर बातचीत जारी थी।
बाहेती ने इस बात पर जोर दिया कि यह संगठन जूट क्षेत्र को समर्पित एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है।
उन्होंने बताया कि केंद्र अनुसंधान गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता देना जारी रखे हुए है।
बाहेती ने कहा, “लगभग दो साल पहले तक, सरकार का एक प्रतिनिधि बोर्ड में था। केंद्र अब भी जूट क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।”
यह विवाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह की जमीन के 1947 के पट्टे से संबंधित है, जिसे 1981 में बिना नवीनीकरण खंड के 30 साल के लिए नवीनीकृत किया गया था।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, 30 जून, 2007 को पट्टा समाप्त होने के बाद बंदरगाह ने संस्थान को परिसर खाली करने का नोटिस जारी किया और बाद में किराए के बकाया व लगभग 9.41 करोड़ रुपये का भुगतान न होने का हवाला देते हुए बेदखली की कार्यवाही शुरू कर दी।
‘इंडियन जूट इंडस्ट्रीज रिसर्च एसोसिएशन’ की स्थापना 1937 में हुई थी और यह संगठन भारत का एकमात्र समर्पित जूट अनुसंधान संस्थान माना जाता है और इसने फाइबर प्रसंस्करण व रेटिंग से लेकर जूट कंपोजिट और विविध उत्पादों तक की तकनीकों पर काम किया है।
भाषा जितेंद्र नेत्रपाल
नेत्रपाल

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