भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते में कार्बन टैक्स बरकरार : जर्मन अधिकारी

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते में कार्बन टैक्स बरकरार : जर्मन अधिकारी

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते में कार्बन टैक्स बरकरार : जर्मन अधिकारी
Modified Date: February 26, 2026 / 10:29 am IST
Published Date: February 26, 2026 10:29 am IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) जर्मनी के पर्यावरण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यहां बताया कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बावजूद यूरोपीय संघ के ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम)’ में कोई छूट नहीं होगी, लेकिन दोनों पक्षों ने आगे बढ़ने के सर्वोत्तम तरीकों को खोजने के लिए तकनीकी वार्ताओं के लिए प्रतिबद्धता जताई है।

जर्मनी के पर्यावरण, प्रकृति संरक्षण, परमाणु सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण मंत्रालय में राज्य मंत्री जॉचेन फ्लासबार्थ ने इस बात पर जोर दिया कि सीबीएएम किसी विशिष्ट देश को लक्षित नहीं करता है, बल्कि यूरोपीय संघ में कार्बन मूल्य निर्धारण लागू होने के बाद एक आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय के रूप में काम करता है।

फ्लैसबार्थ ने भारत की अपनी यात्रा के दौरान बुधवार को ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया, ‘‘सीबीएएम किसी के खिलाफ नहीं है। कार्बन मूल्य निर्धारण लागू करने के बाद आपको किसी न किसी प्रकार की सुरक्षा की आवश्यकता होती है।’’

इस दौरान उन्होंने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, विद्युत मंत्रालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिकारियों के साथ चर्चा की।

मंत्री ने जोर देकर कहा, ‘‘कार्बन मूल्य निर्धारण के संबंध में हमें कुछ करना होगा और हम इस पर चर्चा करना चाहते हैं। मुक्त व्यापार समझौते में यह लिखा है कि इसे सर्वोत्तम तरीके से लागू करने के लिए तकनीकी वार्ताएं होंगी। निश्चित रूप से दुनिया के किसी भी अन्य देश के लिए कोई छूट नहीं होगी। उदाहरण के लिए हम अमेरिका या अन्य देशों के दबाव में नहीं आएंगे, इसलिए भारत निश्चिंत रह सकता है कि कोई छूट नहीं होगी।’’

यूरोपीय संघ का सीबीएएम जनवरी 2026 में अपने अंतिम वित्तीय चरण में प्रवेश कर चुका है। इस समझौते में लौह और इस्पात, एल्युमीनियम और सीमेंट जैसे प्रमुख क्षेत्रों के आयात में निहित कार्बन उत्सर्जन पर शुल्क लगाने का प्रावधान है। इससे भारत में चिंता बढ़ गई है, विशेषकर इस्पात जैसे कार्बन-गहन निर्यात के लिए, जिन्हें अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है, जो मुक्त व्यापार समझौते से मिलने वाले कुछ शुल्क लाभों को संतुलित कर सकती है।

फ्लैसबार्थ ने बढ़ते वैश्विक व्यापार अवरोधों और कठिन भू-राजनीतिक स्थिति के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

फ्लैसबार्थ ने कहा, ‘‘जिस मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति बनी है… उसे जल्द ही अनुमोदित करना होगा। हमने कार्बन मूल्य निर्धारण और उत्सर्जन व्यापार प्रणालियों के क्षेत्र में अधिक सहयोग करने पर भी सहमति व्यक्त की है।’’

फ्लैसबार्थ ने यह भी कहा कि भारत और जर्मनी आगामी अंतर-सरकारी आयोग (आईजीसी) की बैठक के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों पर एक समझौते की पुष्टि करेंगे।

सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच आईजीसी की बैठक जून 2026 में आयोजित होने की संभावना है।

भाषा सुरभि वैभव

वैभव


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