न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद एक समान लाभ मुहैया कराने के लिए केंद्र समिति गठित करे:न्यायालय

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न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद एक समान लाभ मुहैया कराने के लिए केंद्र समिति गठित करे:न्यायालय

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  • Publish Date - August 20, 2026 / 06:08 PM IST,
    Updated On - August 20, 2026 / 06:08 PM IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों के संबंध में एक समान राष्ट्रीय नीति बनाने के लिए समिति गठित करने के वास्ते केंद्र सरकार को एक और सप्ताह का समय दिया है।

उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को यात्रा के दौरान चालक, सुरक्षाकर्मी और सरकारी आवास में ठहरने जैसी सुविधाएं मिलती हैं।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने बृहस्पतिवार को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के उस अनुरोध पर गौर किया, जिसमें केंद्र की ओर से समिति गठित करने के लिए कुछ और समय मांगा गया था।

पीठ ने कहा, ‘‘अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने समिति गठित करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है।’’

शीर्ष अदालत ने इस मामले को अब 10 दिन बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

संक्षिप्त सुनवाई के दौरान पीठ को जब बताया गया कि केंद्र ने अब तक समिति का गठन नहीं किया है तो अदालत ने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वह स्वयं समिति गठित कर देगी।

इससे पहले, 20 जुलाई को पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया था कि वह दो सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को यात्रा के दौरान चालक, सुरक्षाकर्मी और सरकारी आवास में ठहरने जैसी सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सुविधाओं के लिए समान राष्ट्रीय नीति तैयार करने के उद्देश्य से समिति गठित करे।

अदालत ने समिति को इस मुद्दे पर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देने का भी निर्देश दिया था।

पीठ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के संघ (एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज ऑफ द सुप्रीम कोर्ट एंड हाई कोर्ट्स) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. एस. दवे की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को सुरक्षा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का मुद्दा उठाया गया था।

सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कुछ राज्यों की ओर से सुरक्षाकर्मियों और चालकों की नियुक्ति के लिए दी जा रही वित्तीय सहायता की पर्याप्तता पर सवाल उठाया।

सीजेआई ने पूछा, ‘‘क्या 45-50 हजार रुपये में चालक और सुरक्षा अधिकारी रखना संभव है?’’

उन्होंने कहा कि राज्यों में सुविधाओं को लेकर एकरूपता नहीं है। सीजेआई ने सॉलिसिटर जनरल से कहा, ‘‘एक तरीका यह है कि भारत सरकार एक समिति गठित करे और मानक तय करे। केंद्र सरकार अनुदान में अपना योगदान भी दे सकती है। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो मुझे समिति गठित करनी पड़ेगी।’’

केंद्र सरकार की ओर से पेश कानून अधिकारी ने कहा कि ऐसी समिति गठित करने में सरकार को कोई परेशानी नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कोई कठिनाई नहीं है। हम इसका गठन कर सकते हैं। यह ऐसा मुद्दा है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है और इसे उसी भावना के साथ संबोधित किया जाएगा।’’

अपने आदेश में पीठ ने कहा कि यह मामला उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति बाद उपलब्ध कराई जाने वाली विभिन्न सुविधाओं और लाभों की स्वीकार्यता से संबंधित है।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘इन कार्यवाहियों में विचारणीय मुद्दा सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को उपलब्ध कराए जाने वाले कुछ लाभों और सुविधाओं से संबंधित है।’’

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि घरेलू सहायक, चालक, टेलीफोन सुविधा, चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति और सरकारी आवास बनाए रखने जैसी मूलभूत सुविधाएं अलग-अलग राज्यों में काफी भिन्न हैं।

अदालत ने कहा, ‘‘घरेलू सहायक, चालक, टेलीफोन, चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति, सरकारी आवास में ठहरने जैसी मूलभूत सुविधाएं राज्यों के अनुसार अलग-अलग हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इसी असमानता के कारण सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के संघ ने पहले संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया और बाद में इस अदालत के समक्ष याचिका दायर की।’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में एक महत्वपूर्ण पक्षकार है, क्योंकि प्रस्तावित व्यवस्था में राज्यों के साथ वित्तीय भार साझा करने की संभावना शामिल हो सकती है।

भाषा रवि कांत रवि कांत संतोष

संतोष