सर्न के वैज्ञानिकों ने ‘एंटीमैटर’ को पहली बार एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया

सर्न के वैज्ञानिकों ने ‘एंटीमैटर’ को पहली बार एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया

सर्न के वैज्ञानिकों ने ‘एंटीमैटर’ को पहली बार एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया
Modified Date: March 30, 2026 / 07:47 pm IST
Published Date: March 30, 2026 7:47 pm IST

नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) दुनिया की सबसे बड़ी कण भौतिकी प्रयोगशाला संचालित करने वाले यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन (सर्न) के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए जिनेवा स्थित अपनी लैब के मुख्य परिसर में ‘एंटीमैटर’ को सफलतापूर्वक एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाया।

‘एंटीमैटर’, पदार्थ का ही एक प्रकार है, जो प्रतिकणों (एंटीपार्टिकल्स) से बना होता है। इन प्रतिकणों का द्रव्यमान सामान्य पदार्थ के कणों के समान होता है, लेकिन उन पर विद्युत आवेश विपरीत होते हैं।

जब प्रतिपदार्थ (एंटीमैटर), पदार्थ के संपर्क में आता है, तो वह ‘नष्ट’ हो जाता है और समीकरण ई=एमसी² (ई बराबर एमसी स्क्वायर) के अनुसार ऊर्जा मुक्त होती है। इसलिए, एंटीमैटर को सुरक्षित रखना कठिन होता है।

स्विट्जरलैंड स्थित सर्न के ‘बेस’ (बैरियन एंटीबैरियन समरूपता प्रयोग) सहयोग से जुड़े अनुसंधानकर्ताओं ने, अपने द्वारा विकसित ‘पोर्टेबल क्रायोजेनिक पेनिंग ट्रैप’ में 92 एंटीप्रोटॉन एकत्रित किए, जो प्रोटॉन के प्रतिपदार्थ समकक्ष होते हैं।

इसके बाद, संबंधित ‘ट्रैप’ को प्रायोगिक सुविधा से अलग कर एक ट्रक पर लाद दिया गया तथा स्थानांतरित किए जाने के बाद भी उस पर प्रयोग जारी रखा गया।

संगठन के परिसर से होकर गुज़रने वाली यह यात्रा ‘एंटीप्रोटॉन’ को अन्य यूरोपीय प्रयोगशालाओं तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करती है, जहाँ इस प्रतिकण के गुणों का अध्ययन किया जा सकता है।

अनुसंधानकर्ताओं ने एक बयान में कहा, ‘‘आज, दुनिया में पहली बार, सर्न में ‘बेस’ प्रयोग से जुड़े वैज्ञानिकों की टीम ने एक ट्रक में ‘एंटीप्रोटॉन’ से भरा एक ‘ट्रैप’ सफलतापूर्वक प्रयोगशाला के मुख्य परिसर से होकर गुज़ारा।’’

बयान में कहा गया कि इस परीक्षण का अंतिम लक्ष्य एंटीप्रोटॉन को यूरोप की अन्य प्रयोगशालाओं तक पहुँचाना है जैसे कि जर्मनी की हेनरिक हेन यूनिवर्सिटी डसेलडोर्फ, जहाँ एंटीप्रोटॉन के गुणों की अत्यंत उच्च-सटीकता वाली माप की जा सकती है।’’

माना जाता है कि महाविस्फोट (बिग बैंग) से पदार्थ और प्रतिपदार्थ, दोनों ही बराबर मात्रा में उत्पन्न हुए थे; ऐसे में, एक-दूसरे के संपर्क में आने के कारण इन दोनों को एक-दूसरे को नष्ट कर देना चाहिए था, और पीछे एक ऐसा ब्रह्मांड छोड़ जाना चाहिए था जिसमें कुछ भी न हो।

हालाँकि, ब्रह्मांड में पदार्थ की प्रधानता है, और पदार्थ तथा प्रतिपदार्थ के बीच के इस असंतुलन का अध्ययन दुनिया भर के भौतिकविदों द्वारा किया जा रहा है।

भाषा नेत्रपाल नरेश

नरेश


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