प्रतिबंधित आतंकी संगठन की विचारधाराओं के प्रसार के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर
प्रतिबंधित आतंकी संगठन की विचारधाराओं के प्रसार के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर
नयी दिल्ली, 17 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने गुजरात में आतंकी समूह ‘अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (एक्यूआईएस) द्वारा डिजिटल माध्यमों से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने से संबंधित एक मामले में एक महिला समेत पांच लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की पहचान मोहम्मद फरदीन, कुरैशी सेफुल्ला, मोहम्मद फैक, जीशान अली और शमा परवीन के रूप में हुई है और अहमदाबाद की विशेष एनआईए अदालत में दायर आरोप-पत्र में उनके नाम शामिल हैं।
एजेंसी ने एक बयान में कहा कि इस मामले में एनआईए की जांच से पता चला था कि आरोपियों ने प्रतिबंधित एक्यूआईएस की भारत-विरोधी विचारधाराओं के प्रचार और प्रसार के लिए सोशल मीडिया मंच का इस्तेमाल किया था।
इसने कहा कि उन्होंने विभिन्न सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से वीडियो, ऑडियो और तस्वीरों समेत उत्तेजक पोस्ट की।
बयान में आरोप लगाया गया है कि एनआईए ने पाया कि इन पोस्ट के माध्यम से आरोपियों ने लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई भारत सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह और शरिया कानून पर आधारित खिलाफत की स्थापना का आह्वान किया था।
इसमें कहा गया है कि उन्होंने भोले-भाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए अन्य प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की चरमपंथी विचारधाराओं को भी बढ़ावा दिया।
एनआईए ने एटीएस गुजरात से जांच का जिम्मा संभाला था। एनआईए ने जांच के दौरान पांच आरोपियों में से दो से कारतूस समेत पिस्तौल और तलवार जैसे घातक हथियारों के साथ-साथ कागजी और डिजिटल दोनों प्रारूपों में विभिन्न आपत्तिजनक सामग्री जब्त की थी।
एनआईए ने कहा कि जांच में पता चला कि कर्नाटक के बेंगलुरु की रहने वाली शमा परवीन ने सोशल मीडिया के जरिये एक्यूआईएस के वीडियो प्रसारित किये और पहलगाम हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद कट्टरपंथी सामग्री को बढ़ावा देने वाले चरमपंथी समूहों में सक्रिय रूप से भाग लिया।
इसने कहा कि वह पाकिस्तानी नागरिक सुमेर अली के साथ नियमित संपर्क में थी, जिसे वह स्क्रीनशॉट भेजती थी और प्रतिबंधित साहित्य तथा अभियानों पर चर्चा करती थी।
जांच एजेंसी ने कहा कि उसके मोबाइल फोन में चरमपंथी विचारधारा वाले व्यक्तियों द्वारा लिखित आपत्तिजनक पुस्तकें, वीडियो और पाकिस्तानी संपर्क वाले नंबर मिले, जिन्हें जांच के दौरान बरामद किया गया था।
एनआईए की जांच के अनुसार, पुरानी दिल्ली के निवासी मोहम्मद फैक ने ‘‘जिहाद, गजवा-ए-हिंद और समाज के एक वर्ग के खिलाफ हिंसा से संबंधित कट्टरपंथी पोस्ट और भड़काऊ सामग्री साझा करके’’ साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
जांच एजेंसी ने कहा कि उसने अपने ‘इंस्टाग्राम अकाउंट’ और इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से बनाये गये एक समूह के माध्यम से एक्यूआईएस और पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के नेताओं की विचारधारा को बढ़ावा देने वाले चरमपंथी और कट्टरपंथी साहित्य के अंश प्रसारित किये।
इसने कहा कि उसने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर हिंसक विचारधारा और सामग्री को व्यापक रूप से फैलाने के लिए साजिश रची।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश

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