मुख्यमंत्री का पद जनता के विश्वास का प्रतीक है: शिवकुमार

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मुख्यमंत्री का पद जनता के विश्वास का प्रतीक है: शिवकुमार

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  • Publish Date - June 3, 2026 / 09:19 PM IST,
    Updated On - June 3, 2026 / 09:19 PM IST

बेंगलुरु, तीन जून (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने बुधवार को पदभार ग्रहण करने के बाद कहा कि मुख्यमंत्री का पद केवल एक संवैधानिक पद नहीं है, बल्कि यह राज्य की जनता द्वारा उन पर जताए गए विश्वास का प्रतीक है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मिलकर ऐसा कर्नाटक बनाएं जो पहले से अधिक दयालु, समानतापूर्ण और समृद्ध हो।

शिवकुमार ने बुधवार को मुख्यमंत्री जबकि पार्टी के 13 अन्य विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली।

राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने लोक भवन में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

शिवकुमार ने ‘एक्स’ पर लिखा, “मैंने आज लोकभवन में अत्यंत विनम्रता और कृतज्ञतापूर्वक कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह क्षण केवल मेरे लिए नहीं बल्कि कर्नाटक की जनता और लाखों समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके स्नेह और विश्वास ने हर चुनौती से निपटने के लिए मेरा मार्गदर्शन किया।”

उन्होंने कहा, “सुख और दुःख के हर क्षण में, वे मेरी ताकत और प्रेरणा रहे। मैं उन सभी के प्रति आभार जताता हूं जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया और मेरा साथ दिया।”

शिवकुमार ने कहा, “मेरा मानना है कि यह केवल एक संवैधानिक पद नहीं है। यह हमारे राज्य की जनता द्वारा मुझ पर किए गए विश्वास का प्रतीक है। मेरे कंधों पर करोड़ों कर्नाटक वासियों की आशाओं, आकांक्षाओं और सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी है। मैं अपने वरिष्ठों, मार्गदर्शकों और सभी लोगों का हमेशा आभारी रहूंगा, जिन्होंने मेरा मार्गदर्शन किया, प्रोत्साहित किया और मुझे दृढ़ रहने की शक्ति दी।”

उन्होंने कहा कि कर्नाटक हमेशा अवसरों, नवाचार और प्रगति की भूमि रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया अभूतपूर्व गति से बदल रही है, “हमें नए विचारों, प्रौद्योगिकी और सामूहिक प्रयास करके एक मजबूत, अधिक समृद्ध व समावेशी भविष्य बनाना होगा।”

उन्होंने कहा कि हर किसान, मजदूर, उद्यमी, महिला, छात्र और युवा राज्य की विकास यात्रा के अगले अध्याय को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा, “कोई भी नेता अकेले बदलाव नहीं ला सकता। वास्तविक प्रगति तब होती है जब लोग साझा दृष्टिकोण और सामान्य उद्देश्य के साथ एकजुट हों। मुझे दृढ़ विश्वास है कि यदि हम इस मार्ग साथ चलते हैं, तो कोई भी लक्ष्य हमारी पहुंच से बाहर नहीं रहेगा।”

भाषा जोहेब माधव

माधव