सीआईडी ​​ने अभिषेक बनर्जी को तीसरी बार समन जारी किया, मंगलवार को तलब किया

सीआईडी ​​ने अभिषेक बनर्जी को तीसरी बार समन जारी किया, मंगलवार को तलब किया

सीआईडी ​​ने अभिषेक बनर्जी को तीसरी बार समन जारी किया, मंगलवार को तलब किया
Modified Date: June 8, 2026 / 09:48 pm IST
Published Date: June 8, 2026 9:48 pm IST

कोलकाता, आठ जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ​​ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी को राज्य विधानसभा में कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में तीसरी बार पेशी का नोटिस जारी किया और मंगलवार शाम पांच बजे तक एजेंसी के भवानी भवन मुख्यालय में जांचकर्ताओं के सामने पेश होने का निर्देश दिया है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों ने यह भी बताया कि अभिषेक जब पहले भेजे गए दो समन पर हाजिर नहीं हुए, तब उन्हें 24 घंटे की यह मोहलत दी गई। तृणमूल सांसद ने अपील की थी कि सीआईडी की इस कार्रवाई के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय में उनकी अर्जी पर फैसला आने तक समन आदेश को टाल दिया जाए, लेकिन उनके इस अनुरोध को नहीं माना गया। अदालत में 10 जून को उनकी याचिका पर सुनवाई होनी है।

महिला कर्मियों सहित आठ सीआईडी ​​अधिकारियों की एक टीम, अभिषेक बनर्जी के दक्षिण कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर शाम लगभग 4.40 बजे पहुंची थी। यह कदम उनके द्वारा दोपहर में दूसरी पेशी की समय सीमा चूकने के कुछ घंटों बाद उठाया गया। अभिषेक ने आज नयी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन इंडिया की बैठक में भाग लिया था।

सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने उनके आवास के बंद गेट के बाहर कुछ देर इंतजार करने के बाद नोटिस चस्पा करने की प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्ड किया।

अभिषेक से पूछताछ करने के लिए सीआईडी ​​के प्रयासों को अब तक बार-बार स्थगित करने के अनुरोधों का सामना करना पड़ा है। डायमंड हार्बर से सांसद ने पहले स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया और बाद में उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उस कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की, जिसे उन्होंने जबरदस्ती की कार्रवाई करार दिया है।

यह मामला 19 मई को विधानसभा सचिवालय में जमा किए गए एक विवादास्पद पत्र से जुड़ा है, जिसमें शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में नामित किया गया था। आरोप है कि इस पत्र पर तृणमूल के लगभग 70 विधायकों के हस्ताक्षर थे।

बागी विधायकों रीताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा की शिकायतों में हालांकि आरोप लगाया गया कि पत्र पर कुछ हस्ताक्षर जाली थे, जिसके कारण प्राथमिकी दर्ज की गई और सीआईडी ​​​​की जांच शुरू की गई।

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव होने के नाते और उक्त दस्तावेज़ के प्रथम पृष्ठ पर हस्ताक्षर करने वालों में से एक होने के कारण, अभिषेक जांच के दायरे में आ गए, क्योंकि जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि दस्तावेज़ कैसे तैयार किया गया और प्रस्तुत किया गया।

इससे पहले अभिषेक को 30 मई और एक जून को पेशी के लिये सीआईडी समन जारी कर चुकी थी।

भाषा प्रशांत सुरेश

सुरेश


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