सीआईके ने कश्मीर के तीन जिलों में छापे मारे, लश्कर-ए-तैयबा के भर्ती मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया

सीआईके ने कश्मीर के तीन जिलों में छापे मारे, लश्कर-ए-तैयबा के भर्ती मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया

सीआईके ने कश्मीर के तीन जिलों में छापे मारे, लश्कर-ए-तैयबा के भर्ती मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया
Modified Date: March 26, 2026 / 08:23 pm IST
Published Date: March 26, 2026 8:23 pm IST

श्रीनगर, 26 मार्च (भाषा) जम्मू कश्मीर पुलिस की ‘काउंटर इंटेलिजेंस विंग’ ने गैरकानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में बृहस्पतिवार को घाटी के कई स्थानों पर छापेमारी कर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी भर्ती मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) ने तीन जिलों श्रीनगर, गंदेरबल और शोपियां में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया, जिसके तहत इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ। यह मॉड्यूल सीमा पार स्थित आतंकियों के आकाओं के साथ समन्वय और बांग्लादेश में स्थित नेटवर्क से साठगांठ के तहत काम कर रहा था।

अधिकारियों ने बताया कि यूएपीए के तहत सीआईके थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 01/2026 के संबंध में श्रीनगर में एनआईए अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने तलाशी वारंट जारी किया था, जिसपर अमल करते हुए घाटी में 10 स्थान पर छापे मारे गए।

उन्होंने कहा कि जांच के दौरान पता चला कि यह मॉड्यूल लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का आतंकवादी शब्बीर अहमद लोन संभाल रहा है, जो मूल रूप से मध्य कश्मीर के गंदेरबल जिले के कंगन क्षेत्र से है और विभिन्न उपनामों जैसे राजू और जफर सादिक का इस्तेमाल करता है।

एक अधिकारी ने कहा, “यह हैंडलर (आतंकियों का आका) अत्यंत कट्टर और प्रशिक्षित है और इसने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हथियार चलाने का प्रशिक्षण (‘दौरा-ए-आम’ और ‘दौरा-ए-खास’) हासिल किया है।”

‘दौरा-ए-आम’ में, आतंकवादी संगठन के सदस्यों को 21 दिन तक छोटे हथियार और ग्रेनेड फेंकने का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद तीन महीने की विशेष प्रशिक्षण अवधि होती है, जिसे ‘दौरा-ए-खास’ कहा जाता है, जिसमें उन्हें एके राइफल, हल्की मशीन गन, रॉकेट लॉन्चर चलाना और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

अधिकारियों ने कहा कि लोन ने 1990 के दशक के अंत में एक आतंकवादी संगठन को सहयोग प्रदान करने वाले व्यक्ति के रूप में काम किया, इसके बाद 2000 के दशक की शुरुआत में लश्कर में शामिल हो गया।

अधिकारी ने कहा, “इसके बाद वह बांग्लादेश सीमा के रास्ते घुसपैठ करके भारत आया और बड़े हमलों की साजिश रचने समेत आतंकवाद संबंधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा। भारत में कानूनी कार्यवाही का सामना करने के बाद वह बांग्लादेश चला गया, जहां से वह आतंकवादियों की भर्ती और नेटवर्क बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।”

अधिकारियों ने कहा कि जांच में पता चला है कि लोन प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के बड़े सदस्यों के करीबी संपर्क में है और उसने सीमा-पार आतंकवादी मॉड्यूल को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनमें हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में खड़े किए गए मॉड्यूल शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “माना जा रहा है कि फिलहाल वह बांग्लादेश में है और अपने सहयोगियों के नेटवर्क के माध्यम से काम कर रहा है। इस प्रकार वह विदेश से काम करने वाला सबसे वांछित आतंकवादी है।”

भाषा जोहेब सुभाष

सुभाष


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