मणिपुर में शांति के लिए सामुदायिक संवाद जरूरी, सैन्य बल नहीं: किरेन रीजीजू
मणिपुर में शांति के लिए सामुदायिक संवाद जरूरी, सैन्य बल नहीं: किरेन रीजीजू
नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने रविवार को कहा कि मणिपुर में संघर्षरत समुदायों को स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए एक-दूसरे से बातचीत करनी चाहिए, क्योंकि केंद्र सरकार इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए सेना का इस्तेमाल नहीं कर सकती।
रीजीजू ने कहा कि यह संघर्ष तीन साल से अधिक समय से रुक-रुक कर जारी है।
रीजीजू ने यहां असम स्थित प्रतिदिन मीडिया नेटवर्क की ओर से आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि आजादी के बाद से लगातार सरकारों द्वारा छोटे समुदायों के प्रति ‘‘अपमान और उपेक्षा’’ के रवैये के कारण पूर्वोत्तर में बड़ी संख्या में उग्रवादी समूहों का गठन हुआ।
रीजीजू ने 1990 के दशक में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री एस बी चव्हाण के हाथों खुद के अपमानित महसूस करने के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि वह और कुछ अन्य छात्र एक छात्र प्रतिनिधिमंडल के रूप में उनसे मिलने गए थे। उन्होंने कहा कि चव्हाण ने छात्रों के साथ आए तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री पी के थुंगन का भी अपमान किया और छात्रों को ‘‘गुंडा’’ कहकर संबोधित किया।
मणिपुर में जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए संसदीय एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने कहा कि मेइती और कुकी समुदायों के साथ-साथ नगा और कुकी समुदायों को भी सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए एक-दूसरे से बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पास एक सरल सूत्र है। हथियार डाल दें और शांति अपने आप आ जाएगी। हम सेना का इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि इसके बहुत बड़े दुष्प्रभाव होते हैं। समूहों को एक-दूसरे से बातचीत करनी चाहिए। संवाद होना चाहिए। समाधान बातचीत से निकलेगा और तभी शांति कायम होगी।’’
रीजीजू ने कहा कि सभी को संघर्षरत समूहों से हिंसा छोड़ने और हथियार डालने की अपील करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शांति के बिना विकास संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि एक समय था जब केंद्र सरकार का सबसे कनिष्ठ अधिकारी भी पूर्वोत्तर के छोटे समुदायों की समस्याओं को नजरअंदाज कर देता था और कभी-कभी मिलने का समय तक नहीं देता था।
रीजीजू ने कहा, ‘‘इस तरह के व्यवहार से निराश होकर कई समूह पूर्वोत्तर में अपने घर लौट गए, हथियार उठा लिए और हिंसा में शामिल हो गए।’’
मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी उग्रवादियों के हथियार उठाने का समर्थन या औचित्य नहीं ठहरा सकता। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमें यह देखना होगा कि उन्होंने हथियार क्यों उठाए?’’
रीजीजू ने कहा कि हालांकि, नरेन्द्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के पिछले साढ़े 12 वर्षों में स्थिति पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने कहा, ‘‘आज पूर्वोत्तर अब अलग-थलग और उपेक्षित क्षेत्र नहीं है। पिछले साढ़े 12 वर्षों में मैंने जो देखा है, उसके अनुसार इसमें काफी बदलाव आया है। वास्तव में, हम भारत के विकास के प्रमुख केंद्रों में से एक बन रहे हैं।’’
रीजीजू ने कहा कि हालांकि, कभी-कभी एक या दो घटनाएं पूरी प्रगति को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साढ़े 12 वर्षों में 10,000 से अधिक उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया है और मुख्यधारा में शामिल हुए हैं।’’
अरुणाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव से अपनी जीवन यात्रा साझा करते हुए रीजीजू ने कहा, ‘‘मैं ऐसी दूरदराज जगह पर पला-बढ़ा, जहां मुझे नहीं पता था कि दुनिया में क्या हो रहा है। ऐसे माहौल से आने के बाद आज मैं ऐसी स्थिति में हूं, जहां मेरे फैसले और योगदान राष्ट्रीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण हैं।’’
मंत्री ने यह भी कहा कि संसद भारतीय लोकतंत्र का प्रतीक है। उन्होंने कहा, ‘‘वहां बैठकर नीतियां बनाना और भारत के भविष्य को आकार देना मेरे जैसे व्यक्ति के लिए एक महान यात्रा और बड़ा अवसर है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे मतदाताओं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मुझ पर भरोसा है कि मैं इस पद पर बैठकर हमारे लोकतंत्र की भविष्य की दिशा तय करने और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के दृष्टिकोण के साथ काम करूं।’’
भाषा अमित नरेश
नरेश

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