‘रचनात्मक कांग्रेस’ के अधिवेशन में आर्थिक असमानता, बेरोजगारी पर चिंता जताई गई
‘रचनात्मक कांग्रेस’ के अधिवेशन में आर्थिक असमानता, बेरोजगारी पर चिंता जताई गई
नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के प्रकोष्ठ ‘रचनात्मक कांग्रेस’ का दो दिवसीय अधिवेशन बुधवार को आरंभ हुआ, जिसमें बढ़ती आर्थिक असमानता, बेरोजगारी, पर्यावरणीय क्षरण और शिक्षा-स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश घटने पर चिंता जताई गई तथा सरकार के स्तर पर समावेशी नीतियों की जरूरत पर जोर दिया गया।
पार्टी मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में बुधवार से शुरू हुए इस अधिवेशन में सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, कलाकारों और समुदायों के प्रतिनिधियों ने अर्थव्यवस्था, रोजगार, गरीबी, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और संस्कृति सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
संगठन की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रतिभागियों ने कहा कि असमानता, गरीबी और बेरोजगारी को परस्पर जुड़ी समस्याओं के रूप में देखा जाना चाहिए तथा इन्हें नीतिगत बदलावों के जरिये दूर किया जा सकता है।
अधिवेशन के पहले दिन शिक्षा और स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण नीतिगत क्षेत्र बताते हुए सार्वजनिक खर्च बढ़ाने की मांग की गई।
प्रतिभागियों ने कहा कि अधिक प्रगतिशील कर व्यवस्था के जरिये सार्वजनिक संसाधन बढ़ाए जा सकते हैं। उन्होंने सार्वजनिक उपक्रमों के विस्तार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य में निवेश बढ़ाने और वंचित वर्गों के लिए सब्सिडी सुनिश्चित करने की वकालत की।
सम्मेलन में कुछ वक्ताओं ने आर्थिक नीतियों को सांप्रदायिक तनाव और नफरत की राजनीति से भी जोड़ा।
पर्यावरण के मुद्दे पर वक्ताओं ने आदिवासी और पांचवीं तथा छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। असम, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में खनन, जंगलों की कटाई और औद्योगिक प्रदूषण से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए।
भाषा हक हक नरेश
नरेश

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