संघर्ष केवल बाहरी दुनिया में नहीं बल्कि यह व्यक्ति के मन में भी चलता है: उपराष्ट्रपति

संघर्ष केवल बाहरी दुनिया में नहीं बल्कि यह व्यक्ति के मन में भी चलता है: उपराष्ट्रपति

संघर्ष केवल बाहरी दुनिया में नहीं बल्कि यह व्यक्ति के मन में भी चलता है: उपराष्ट्रपति
Modified Date: April 5, 2026 / 04:45 pm IST
Published Date: April 5, 2026 4:45 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि ध्यान से शांति, स्पष्टता और सकारात्मक दृष्टिकोण प्राप्त करने में मदद मिल सकती है तथा संघर्ष केवल बाहरी दुनिया में नहीं चलता है बल्कि यह व्यक्ति के मन में भी होता है।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि ध्यान की वास्तविक शक्ति इंसान को बदलने में निहित है।

उन्होंने कहा कि ध्यान तनाव को कम करने, एकाग्रता बढ़ाने एवं भावनात्मक लचीलेपन को बढ़ाने में तथा अत्यधिक सोचने एवं अत्यधिक काम करने जैसी समस्याओं के समाधान में मदद करता है ।

उपराष्ट्रपति ने यहां ध्यान पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि संघर्ष केवल बाहरी दुनिया में नहीं चलता है बल्कि यह व्यक्ति के मन में भी चलता रहता है।

एक सरकारी बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि ध्यान शांति, स्पष्टता और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करके तथा दूसरों को सुनने और समझने की क्षमता को बढ़ावा देकर एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है।

तमिल संत तिरुमूलर की शिक्षाओं को याद करते हुए, राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि ध्यान एक आंतरिक दीपक जलाने के समान है जो अज्ञान को दूर करता है और सत्य एवं शांति की ओर ले जाता है।

उन्होंने बताया कि तिरुमूलर ने मानव शरीर को मंदिर और ध्यान को भीतर के दैवीय स्वरूप को जानने का साधन बताया था।

उपराष्ट्रपति ने सार्थक जीवन की कीमत पर भौतिक सफलता की ओर निरंतर लगे रहने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि धन से आराम तो मिलना चाहिए, लेकिन यह जीवन पर हावी नहीं होना चाहिए।

राधाकृष्णन ने इस धारणा को भी दूर करने का प्रयास किया कि ध्यान केवल आध्यात्मिक साधकों के लिए है। उन्होंने कहा कि यह सभी के लिए है और साधारण व्यक्तियों को भी उच्च चेतना की ओर ले जा सकता है।

भाषा राजकुमार नरेश

नरेश


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