ईरान में फंसे उत्तराखंड के लोगों को वापस लाने की कांग्रेस विधायक ने लगायी गुहार,चिंता में डूबे परिजन

ईरान में फंसे उत्तराखंड के लोगों को वापस लाने की कांग्रेस विधायक ने लगायी गुहार,चिंता में डूबे परिजन

ईरान में फंसे उत्तराखंड के लोगों को वापस लाने की कांग्रेस विधायक ने लगायी गुहार,चिंता में डूबे परिजन
Modified Date: March 5, 2026 / 08:20 pm IST
Published Date: March 5, 2026 8:20 pm IST

देहरादून, पांच मार्च (भाषा) अमेरिका-इजराइल तथा ईरान के बीच संघर्ष के कारण वहां तथा अन्य खाड़ी देशों में फंसे उत्तराखंड के लोगों के बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दिया गया है जबकि कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने सरकार से राज्य के नागरिकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है।

उधर, ईरान में बढ़ते संघर्ष के बीच वहां फंसे अपने परिजनों की खैरियत के लिए चिंतित उनके परिवारों के पास बस आधे मिनट की एक फोन कॉल का सहारा है, जिससे वे किसी तरह अपनों की सलामती की उम्मीद बांधे हुए हैं।

अधिकारिक सूत्रों ने यहां बताया कि ईरान या अन्य खाड़ी देशों में रह रहे राज्य के ऐसे लोगों के नाम, पते और पासपोर्ट संबंधी जानकारियां इकट्ठी की जा रही हैं।

इस बीच, हरिद्वार जिले के मंगलौर से कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन ने ईरान के लगातार बिगड़ते हालात के मददेनजर उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन को पत्र लिखकर वहां फंसे राज्य के नागरिकों की वापसी की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।

पत्र में निजामुद्दीन ने लिखा है कि ईरान में मंगलौर समेत उत्तराखंड के अनेक नागरिक फंसे हुए हैं और वहां की अस्थिर एवं चिंताजनक स्थिति को देखते हुए उनके परिजन अत्यंत व्यथित एवं चिंतित है।

मामले को संवेदनशील बताते हुए विधायक ने कहा, ‘‘अत: आपसे अनुरोध है कि उत्तराखंड सरकार केंद्र से समन्वय स्थापित कर ईरान में फंसे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करे तथा उनकी शीघ्र एवं सुरक्षित भारत वापसी की व्यवस्था करे ।’’

अपने पत्र के साथ निजामुद्दीन ने ईरान में फंसे मंगलौर क्षेत्र के 32 लोगों की सूची भी संलग्न की है जो वहां पढ़ने के लिए गए हैं ।

युद्ध के कारण ईरान और आसपास के खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों में खौफ का माहौल है जबकि उनके परिजन उनकी सुरक्षा को लेकर यहां चिंता में हैं ।

देहरादून के अंबारी गांव के कई परिवार इन दिनों गहरी बेचैनी में दिन काट रहे हैं । ईरान में बढ़ते संघर्ष के बीच वहां फंसे अपने परिजनों की खैरियत के लिए उनके पास बस आधे मिनट की एक फोन कॉल का सहारा है, जिससे वे किसी तरह अपनों की सलामती की उम्मीद बांधे हुए हैं।

गांव के निवासी जाकिर हुसैन इस्लामी अध्ययन के लिए ईरान गई बेटी और दामाद की खैरियत जानने के लिए अपने मोबाइल फोन पर टकटकी लगाए रहते हैं।

हुसैन के भाई-भाभी, उनके बच्चे और एक भतीजे सहित परिवार के कई सदस्य भी वहीं हैं।

उन्होंने कहा कि हालात बिगड़ने के बाद से संपर्क करना लगभग नामुमकिन सा हो गया है । हुसैन ने बताया, “कल रात एक फोन आया था, मुश्किल से आधा मिनट ही बात हुई। मेरी बेटी बस इतना ही कह पाई—‘फिक्र मत कीजिए, हम ठीक हैं,’ और तभी लाइन कट गई।”

उन्होंने कहा कि उस छोटी-सी बातचीत के बाद से फोन फिर बंद आ रहा है।

हुसैन ने अपनी पत्नी को लेकर गहरी चिंता जताई, जिन्हें पहले से ही बेचैनी और घबराहट की शिकायत है। उन्होंने कहा, “मैं उसे वहां के पूरे हालात भी नहीं बता पा रहा हूं। मुझे डर है कि अगर कुछ बताया तो कहीं उसकी तबीयत और न बिगड़ जाए।”

अंबारी गांव के ही निवासी अयूब खान का परिवार भी ऐसी ही चिंता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। खान के भतीजे और उसकी पत्नी पिछले चार वर्षों से ईरान में इस्लामी अध्ययन कर रहे हैं।

खान ने बताया कि बुधवार रात उनके भतीजे का फोन आया था और उसने कहा कि वह तेहरान से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित अपने छात्रावास में सुरक्षित है।

खान ने कहा, “फिलहाल वे ठीक हैं, लेकिन डर बना हुआ है कि हालात किसी भी पल बदल सकते हैं।”

परिजनों का कहना है कि उनकी पीड़ा अभी तक केंद्र सरकार या विदेश मंत्रालय तक नहीं पहुंची है।

हुसैन ने बताया कि स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) के अधिकारी एक बार आए थे और उन्होंने परिजनों के नाम, पता तथा पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी जुटाई थी, लेकिन उसके बाद प्रशासन की ओर से न तो कोई संपर्क किया गया और न ही किसी तरह का भरोसा दिया गया।

अब ये परिवार सरकार से हस्तक्षेप करने और ईरान में फंसे अपने रिश्तेदारों को सुरक्षित भारत वापस लाने की अपील कर रहे हैं।

अंबारी के इन घरों में हर सुबह एक उम्मीद के साथ शुरू होती है—शायद आज फोन आएगा।

हुसैन ने कहा, “हम बस इतना जानना चाहते हैं कि वे सुरक्षित हैं। जब तक हम उन्हें सही-सलामत भारत लौटते नहीं देखेंगे, तब तक दिल को चैन नहीं मिलेगा।”

फिलहाल गांव का माहौल इन परिवारों की बेचैनी से घिरा हुआ है, जो किसी ऐसी खबर का इंतजार कर रहे हैं जो उनके दिलों को थोड़ा सुकून दे सके।

भाषा दीप्ति राजकुमार

राजकुमार


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