ईवीएम की सटीकता पर कांग्रेस का सवाल, भाजपा ने ‘वोट चोरी’ के नारे पर बताया ‘सीधा प्रहार’
ईवीएम की सटीकता पर कांग्रेस का सवाल, भाजपा ने ‘वोट चोरी’ के नारे पर बताया ‘सीधा प्रहार’
बेंगलुरु, दो जनवरी (भाषा) कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने शुक्रवार को उस सर्वेक्षण की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया, जिसमें बताया गया कि राज्य के अधिकांश नागरिक मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र व निष्पक्ष तरीके से कराए जाते हैं और ईवीएम सटीक परिणाम देती हैं।
विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हालांकि इस रिपोर्ट को राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के दावे पर सीधा प्रहार बताया।
ये निष्कर्ष कर्नाटक निगरानी एवं मूल्यांकन प्राधिकरण (केएमईए) के लिए प्रकाशित ‘लोकसभा चुनाव 2024: नागरिकों के ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार के अंतिम सर्वेक्षण का मूल्यांकन’ नाम के अध्ययन का हिस्सा हैं।
अगस्त 2025 की इस सर्वेक्षण रिपोर्ट को हाल ही में सार्वजनिक किया गया है।
यह प्राधिकरण योजना, कार्यक्रम निगरानी एवं सांख्यिकी विभाग के अधीन कार्य करता है और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देने वाली राज्य की सर्वोच्च संस्था है।
यह अध्ययन कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा कार्यान्वित व्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं चुनावी भागीदारी कार्यक्रम के प्रभाव का आकलन करने के लिए कराया गया था।
सर्वेक्षण, मई 2025 में मैसूर स्थित ग्राम (ग्रासरूट रिसर्च एंड एडवोकेसी मूवमेंट) द्वारा किया गया था।
ये निष्कर्ष कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में जारी ‘वोट चोरी’ अभियान के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं, जिसमें केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार और भारतीय निर्वाचन आयोग को निशाना बनाया गया है।
कर्नाटक के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “यह सर्वेक्षण राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से आयोग द्वारा कराया गया था। यह सर्वेक्षण मोदी के एक खास आदमी द्वारा किया गया था, जो प्रधानमंत्री कार्यालय में काम करता है और जिसने प्रधानमंत्री की जमकर प्रशंसा करते हुए एक किताब लिखी है।”
उनका इशारा ग्राम के संस्थापक आर. बालासुब्रमण्यम की ओर था। उन्होंने बताया कि यह सर्वेक्षण मई 2025 में किया गया था जबकि कांग्रेस ने वोट चोरी का विस्तृत खुलासा अगस्त 2025 में किया था।
खरगे ने कहा, “सर्वेक्षण में प्रत्येक विधानसभा से केवल 50 उत्तरदाताओं को शामिल किया गया था।”
उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण सांख्यिकीय रूप से कमजोर है, इसमें व्यापक त्रुटियां और चयन पूर्वाग्रह की संभावना है तथा यह निष्कर्ष निकालने के लिए उपयुक्त नहीं है।
मंत्री ने भाजपा पर इस सर्वेक्षण को ‘राज्य सरकार का सर्वेक्षण’ बताकर ‘झूठा प्रचार’ करने का आरोप लगाते हुए कहा, “दिलचस्प बात यह है कि भाजपा वोट चोरी के आरोप पत्र पर चुप है, जिसमें पूर्व भाजपा विधायक को आरोपी संख्या एक के रूप में नामित किया गया है।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद के सदस्य बीके हरिप्रसाद ने बताया कि ग्राम के सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि कर्नाटक में अधिकांश प्रतिशत लोगों ने ईवीएम प्रणाली को स्वीकार कर लिया है।
उन्होंने कहा कि इस सर्वेक्षण के जरिये निर्वाचन आयोग को समर्थन करने जैसा प्रतीत होता है।
हरिप्रसाद ने बताया, “सर्वेक्षण का स्वरूप आयोग के पक्ष में है। प्रश्न विश्वास और धारणा पर आधारित हैं न कि सत्यापन योग्य ऑडिट, पारदर्शिता या जवाबदेही पर।”
भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने सर्वेक्षण रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस का “वोट चोरी” का नारा एक बार फिर बेनकाब हो गया है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, “कर्नाटक सरकार द्वारा प्रकाशित सर्वेक्षण रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि हमारे लोगों का एक बड़ा बहुमत मानता है कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से कराए जाते हैं। यह राहुल गांधी के लिए एक करारा प्रहार है, जो कांग्रेस की लगातार चुनावी विफलताओं को स्वीकार न कर पाने के कारण “वोट चोरी” का नारा गढ़ने और निर्वाचन आयोग पर संदेह करने के लिए एक गैर-जिम्मेदाराना अभियान चलाने का सहारा लिया।”
विजयेंद्र ने कहा कि ऐसा करके, उन्होंने बार-बार जनता को गुमराह करने और एक बेदाग संवैधानिक संस्था में विश्वास को कमजोर करने का प्रयास किया।
कर्नाटक के 102 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 5,100 उत्तरदाताओं को इस सर्वेक्षण में शामिल किया गया था।
भाषा जितेंद्र माधव
माधव

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