न्याय को सर्व सुलभ बनाने के लिए कानूनी सहायता, कल्याणकारी योजनाओं में समन्वय हो: प्रधान न्यायाधीश

न्याय को सर्व सुलभ बनाने के लिए कानूनी सहायता, कल्याणकारी योजनाओं में समन्वय हो: प्रधान न्यायाधीश

न्याय को सर्व सुलभ बनाने के लिए कानूनी सहायता, कल्याणकारी योजनाओं में समन्वय हो: प्रधान न्यायाधीश
Modified Date: May 9, 2026 / 08:05 pm IST
Published Date: May 9, 2026 8:05 pm IST

नोंगपोह (मेघालय), नौ मई (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अंतिम छोर तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कानूनी सहायता और कल्याणकारी योजनाओं के समन्वय की आवश्यकता पर शनिवार को जोर दिया।

मेघालय के री भोई जिले में एक जागरूकता शिविर का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के प्रमुख संरक्षक न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच, शैक्षिक सहायता, आजीविका के अवसर और पुनर्वास सहायता को ऐसे शिविरों के माध्यम से एक साथ लाया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचे।

मेघालय उच्च न्यायालय और मेघालय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एमएसएलएसए) द्वारा राज्य सरकार के साथ साझेदारी में, री भोई जिले के मारनगर में “दूरियों को पाटना” विषय के तहत एनएएलएसए योजनाओं और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं पर एक विशाल शिविर-सह-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

उन्होंने सभी हितधारकों से न्याय तक पहुंच को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह करते हुए कहा, “यह बहुत जरूरी है कि सरकारी विभागों, संगठनों और कानूनी संस्थानों द्वारा कार्यान्वित की जाने वाली ये सभी कल्याणकारी योजनाएं एक ही छत के नीचे सभी के लिए उपलब्ध हों।”

प्रधान न्यायाधीश ने जमीनी स्तर पर कानूनी सेवाएं प्रदान करने में अर्ध-न्यायिक स्वयंसेवकों की भूमिका को भी स्वीकार किया और उनकी भर्ती को मजबूत करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने मेघालय की अनूठी पारंपरिक प्रथाओं की सराहना करते हुए, पारंपरिक न्याय प्रणालियों को संवैधानिक ढांचे के साथ संरेखित करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

भाषा प्रशांत पवनेश

पवनेश


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