पंजाब में कफ सिरप नशे की ‘दूसरी लहर’ के तौर पर उभर रहा : एनसीबी रिपोर्ट
पंजाब में कफ सिरप नशे की ‘दूसरी लहर’ के तौर पर उभर रहा : एनसीबी रिपोर्ट
(नीलाभ श्रीवास्तव)
नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) पंजाब में खांसी के इलाज में इस्तेमाल कफ सिरप की सबसे अधिक आठ लाख बोतलें जब्त की गई हैं और यह मादक पदार्थ की ‘खतरनाक दूसरी लहर’ के तौर पर उभरी हैं। राष्ट्रीय स्वापक ब्यूरो (एनसीबी) की शुक्रवार को जारी रिर्पोट में यह खुलासा हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में भारत-पाकिस्तान सीमा के रास्ते ड्रोन से मादक पदार्थ गिराने के सबसे अधिक 97 प्रतिशत मामले और देश में कुल जब्त हेरोइन में करीब 58 प्रतिशत हिस्सेदारी पंजाब की है।
एनसीबी की 2025 की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि हेरोइन की ये जब्ती पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान-ईरान गलियारे के रास्ते मादक पदार्थ तस्करी के मामले में पंजाब की ‘अहम भूमिका’ को रेखांकित करती है। साथ ही, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत को दवाओं के मादक पदार्थ के तौर पर दुरुपयोग और उनकी तस्करी से ‘बढ़ती चुनौती’ का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में हाल की एक घटना का भी ज़िक्र किया गया है, जिसमें मादक पदार्थ तस्कर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की भौगोलिक स्थिति का ‘फ़ायदा उठा’ रहे हैं। वे सुनसान द्वीपों का इस्तेमाल सामान छिपाकर रखने और समुद्र के बीचों-बीच सामान उतारने के लिए कर रहे हैं, और भारी मात्रा में मादक पदार्थ की तस्करी के लिए गहरे समुद्र में जहाजों के गोपनीय बेड़ों (डार्क वेसल्स) का सहारा ले रहे हैं।
दस्तावेज में कहा गया, ‘‘अगर वहां कानून लागू करने वाली कोई स्थायी और समर्पित टीम मौजूद नहीं रही, तो इन द्वीपों के ‘गोल्डन ट्राएंगल’ (मादक पदार्थों की तस्कारी के लिए स्वर्णिम त्रिकोण थाईलैंड-म्यांमा-लाओस) के पश्चिम की ओर विस्तार के लिए एक अहम केंद्र बनने का खतरा है।’’
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों को संकलित कर तैयार की गई 180 पन्नों की यह रिपोर्ट, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यहां देश भर में मादक पदार्थों के खिलाफ काम करने वाली एजेंसियों की एक शीर्ष-स्तरीय (नार्को-समन्वय केंद्र या एनसीओआरडी) बैठक के दौरान जारी की।
मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े देश भर के अलग-अलग आंकड़े पेश करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही जब्त की जाने वाली हेरोइन की मात्रा कम हो रही है, लेकिन पिछले साल ऐसे मामलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इससे संकेत मिलता है कि अब छोटी-छोटी खेपें ज़्यादा बार भेजी जा रही हैं, ऐसा शायद इसलिए हो रहा है क्योंकि मादक पदार्थ की उपलब्धता कम हो गई है और इसके खिलाफ कार्रवाई तेज़ कर दी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल भारत में जब्त की गई कुल 3,567 किलोग्राम हेरोइन में से 2,085.55 किलोग्राम (58 प्रतिशत) पंजाब से बरामद हुई, जिससे ‘गोल्डन क्रिसेंट’ से जुड़ी तस्करी में राज्य की अहम भूमिका की पुष्टि होती है।
‘गोल्डन क्रिसेंट’ या ‘डेथ क्रिसेंट’ भारत की पश्चिमी सीमाओं पर स्थित मादक पदार्थ तस्करी के लिए बदनाम अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान कॉरिडोर के संदर्भ मे इस्तेमाल किया जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन के जरिए मादक पदार्थ की तस्करी ‘ऐतिहासिक’ स्तर पर पहुंच गई है। इसके मुताबिक 2024 में ड्रोन से मादक पदार्थ की तस्करी को लेकर दर्ज मामलों में 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और 468 किलोग्राम मादक पदार्थ (मुख्य रूप से हेरोइन) ज़ब्त किए गए हैं।
इसमें कहा गया कि मादक पदार्थ की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने के 305 मामलों में से 289 मामले (लगभग 97.7 प्रतिशत) पंजाब से जुड़े थे। रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन के जरिए मादक पदार्थ की तस्करी की बाकी घटनाएं राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में हुईं।
रिपोर्ट में कहा गया कि ड्रोन के जरिए मादक पदार्थ तस्करी के इस ‘खतरे’ का दायरा ऐसे मामलों में वृद्धि से स्पष्ट होता है। इसमें कहा गया कि 2021 में केवल ऐसी तीन घटनाओं में 10 किलोग्राम मादक पदार्थ तस्करी के मामले सामने आए लेकिन 2022 में यह संख्या बढ़कर 35 (148 किलो) हो गई, 2023 में घटकर 28 (103 किलो) रह गई, लेकिन फिर तेज़ी से बढ़कर 2024 में 179 घटनाएं (236 किलो) और 2025 में 305 घटनाएं (468 किलो) हो गईं, यानी पांच सालों में इसमें 100 गुना बढ़ोतरी हुई।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘यह तेज़ी से हुई बढ़ोतरी तस्करी करने वाले उन नेटवर्क की बढ़ती परिचालन परिपक्वता को दिखाती है, जो पारंपरिक सीमा नियंत्रण से बचने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।’’
रिपोर्ट में दवाओं के मादक पदार्थ के तौर पर दुरुपयोग को लेकर चिंता जताते हुए कहा गया कि 2021 से 2025 के बीच इस तरह की प्रतिबंधित दवाओं की ज़ब्ती में ‘‘मामूली उतार-चढ़ाव के साथ लगातार बढ़ोतरी’’ देखी गई है।
यह परिपाटी इन पांच सालों में 77 प्रतिशत से ज़्यादा की ‘काफ़ी’ बढ़ोतरी दिखाती है, जो नियामकीय निगरानी के बढ़ने और रोक लगाने की बेहतर क्षमताओं को रेखांकित करता है।
इसमें फिर से पंजाब का जिक्र करते हुए कहा गया है कि राज्य में मादक पदार्थ के तौर पर इस्तेमाल दवाएं ‘दूसरी खतरनाक लहर’ के तौर पर उभरी हैं। वर्ष 2025 में यहां कोडीन आधारित कफ़ सिरप की 8,95,508 बोतलें जब्त की गईं, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ नियमों का पालन न करने वाली दवा की दुकानों से ब्यूप्रेनॉर्फ़िन, ट्रामाडोल और अल्प्राज़ोलम जैसी सस्ती और कानूनी रूप से बनी दवाएं आसानी से मिल जाती हैं, जिससे गलत तरीके से हासिल की गई ये दवाएं एक आसान विकल्प बन गई हैं।’’
इस दस्तावेज़ में भारत की ‘पड़ोसी देशों और पश्चिम अफ्रीका से संचालित होने वाले मानव तस्करी नेटवर्क के प्रति संवेदनशीलता’ पर भी प्रकाश डाला गया है, जिसमें कहा गया है कि पिछले वर्ष विभिन्न एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किए गए 747 विदेशी नागरिकों में से सबसे अधिक नेपाल (203), नाइजीरिया (146) और म्यांमार (97) से थे। अन्य में बांग्लादेश (17), केन्या (10) और घाना (9)के नागरिक शामिल थे।
भाषा धीरज नरेश
नरेश

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