न्यायालय ने व्यक्ति की मदद की, भुगतान में चूक न होने के बावजूद क्रेडिट स्कोर वर्षों से था ‘निगेटिव’
न्यायालय ने व्यक्ति की मदद की, भुगतान में चूक न होने के बावजूद क्रेडिट स्कोर वर्षों से था ‘निगेटिव’
नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उस व्यक्ति की मदद की है जिसका क्रेडिट स्कोर वर्षों तक ‘‘निगेटिव’’ रहा, जबकि उस पर कोई बकाया ऋण नहीं था और न ही उसने भुगतान में कोई चूक की थी।
न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ उत्तराखंड निवासी राजेंद्र सिंह पंवार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2020 से उनका सीआईबीएल स्कोर ‘निगेटिव’ है, जबकि उन पर कोई ऋण नहीं है और न ही उन्होंने कोई चूक की है।
सीआईबीएल स्कोर तीन अंकों का एक संख्यात्मक डेटा होता है जो ऋण इतिहास का सारांश प्रस्तुत करता है और किसी व्यक्ति की ऋण पात्रता को दर्शाता है। अपनी याचिका में, पंवार ने बताया कि उनके क्रेडिट प्रोफाइल में निगेटिव स्कोर है, जिसके कारण वह वित्तीय सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
पंवार ने दावा किया कि इसी नाम के दो अन्य व्यक्तियों को भी वही पैन नंबर जारी किया गया था और उन व्यक्तियों द्वारा भुगतान में की गई चूक का रिकॉर्ड कथित तौर पर उनके सीआईबीएल रिकॉर्ड में दर्ज है। पंवार ने कहा कि नया पैन मिलने के बाद भी, नए और पुराने पैन के बीच संबंध होने के कारण उनका उच्च जोखिम स्कोर बना रहा।
इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने एसबीआई और पीएनबी सहित प्रमुख बैंकों से जवाब मांगा तथा उनसे यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या पंवार पर कोई बकाया ऋण या डिफ़ॉल्ट (चूक) है।
उच्चतम न्यायालय में दायर हलफनामे में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने सूचित किया कि उसने पंवार के खिलाफ किसी भी चूक की रिपोर्ट नहीं की है और रिकॉर्ड में कोई प्रतिकूल क्रेडिट जानकारी दर्ज नहीं है।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने न्यायालय को बताया कि उसने सीआईबीआईएल को जो जानकारी दी थी, वह केवल उन्हीं सुविधाओं तक सीमित थी जिन्हें याचिकाकर्ता ने वास्तव में लिया था और जो उसके अद्यतन पैन जानकारी से जुड़ी थीं।
इसके बाद सीआईबीआईएल ने अदालत को बताया कि पंवार का रिकॉर्ड अब स्पष्टीकरण के आधार पर ठीक कर दिया गया है।
भाषा अमित नेत्रपाल
नेत्रपाल

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