निजी स्कूलों को शुल्क विनियमन समिति बनाने का निर्देश देने वाले आदेश पर रोक लगाने से अदालत का इनकार

निजी स्कूलों को शुल्क विनियमन समिति बनाने का निर्देश देने वाले आदेश पर रोक लगाने से अदालत का इनकार

निजी स्कूलों को शुल्क विनियमन समिति बनाने का निर्देश देने वाले आदेश पर रोक लगाने से अदालत का इनकार
Modified Date: January 8, 2026 / 08:44 pm IST
Published Date: January 8, 2026 8:44 pm IST

नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजधानी के निजी स्कूलों को शुल्क विनियमन समिति बनाने का निर्देश देने वाली अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन ऐसी समितियों के गठन के लिए समय बढ़ा दिया।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम 2025, और उसके बाद के नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय और उपराज्यपाल को नोटिस जारी किया और उनसे जवाब दाखिल करने को कहा।

याचिकाओं में शिक्षा निदेशालय की 24 दिसंबर 2025 की अधिसूचना को भी चुनौती दी गई थी। कानून और उसके नियमों के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए स्कूल-स्तरीय शुल्क विनियमन समिति (एसएलएफआरसी) के गठन और कामकाज के संबंध में अधिसूचना जारी की गई थी।

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अदालत ने कमेटी गठित करने की अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और इसके गठन के लिए समय 10 जनवरी से बढ़ाकर 20 जनवरी कर दिया।

पीठ ने यह भी कहा कि स्कूल प्रबंधन द्वारा कमेटियों को प्रस्तावित फीस जमा करने की अंतिम तिथि भी 25 जनवरी से बढ़ाकर 5 फरवरी कर दी जानी चाहिए।

अदालत ने कहा, ‘‘इस बीच, एक अंतरिम उपाय के रूप में, हम यह निर्देश देते हैं कि दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी 24 दिसंबर, 2025 की उक्त अधिसूचना के संदर्भ में किया गया कोई भी काम इन याचिकाओं में पारित आगे के आदेशों के अधीन होगा।’’

नए ढांचे के तहत, प्रत्येक निजी स्कूल को एक एसएलएफआरसी का गठन करना होगा। इस समिति में स्कूल प्रबंधन, प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक, पांच अभिभावक और शिक्षा विभाग से एक नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में लॉटरी प्रणाली के माध्यम से सदस्यों का चयन किया जाएगा।

एसएलएफआरसी स्कूल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत शुल्क प्रस्तावों की जांच करेगा और 30 दिनों के भीतर निर्णय लेगा।

भाषा रंजन वैभव

वैभव


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