लिपुलेख दर्रे के रास्ते भारत-चीन के बीच सीमापार व्यापार छह साल बाद फिर शुरू होगा
लिपुलेख दर्रे के रास्ते भारत-चीन के बीच सीमापार व्यापार छह साल बाद फिर शुरू होगा
पिथौरागढ़, 24 जून (भाषा) भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के रास्ते सीमापार व्यापार लगभग छह साल के अंतराल के बाद 26 जून से फिर से शुरू हो जाएगा, जब 26 भारतीय व्यापारियों का पहला जत्था इस मार्ग से चीन शासित तिब्बत में प्रवेश करेगा। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
धारचूला के उप विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और व्यापार अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि 17 भारतीय व्यापारियों और नौ सहायकों को 26 व्यापार पास जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पास हासिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए गुंजी में एक सीमा शुल्क कार्यालय भी खोला गया है।
जोशी ने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारतीय व्यापारियों का पहला जत्था 26 जून को तिब्बत पहुंच जाएगा, क्योंकि उन्होंने अपना सामान पहले ही लिपुलेख दर्रे के पास स्थित गांवों के गोदामों में रखवा दिया है।”
उन्होंने बताया कि प्रशासन को 103 से ज्यादा व्यापारियों से आवेदन मिले हैं और वह जल्द ही 25 व्यापारियों के दूसरे जत्थे के लिए व्यापार पास जारी करने की योजना बना रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, व्यापारियों की मदद के लिए प्रशासन ने नाभिधांग के पास खच्चरों और घोड़ों के लिए एक जगह तय की है, ताकि वे लिपुलेख दर्रे तक सामान पहुंचा सकें। यह दर्रा उस जगह से लगभग 600 मीटर दूर है।
भारत और चीन के बीच 1962 के युद्ध के बाद बंद हुए सीमा व्यापार को 1991 में एक समझौता ज्ञापन के तहत फिर से शुरू किया गया था। हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण 2020 में इसे फिर से रोक दिया गया था।
धारचूला में भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंगकली ने कहा कि वापस आने वाले व्यापारियों के समक्ष आपूर्ति शृंखला संबंधी चुनौतियां होंगी।
उन्होंने कहा, “तिब्बती मार्ट पहुंचने पर हमारी सबसे पहली प्राथमिकता वहां छह साल पहले रखे गए अपने सामान की हालत देखना है। नुकसान का आकलन करने के बाद ही हम सरकार से राहत पैकेज की मांग करेंगे, ताकि लंबे समय तक सामान रखे रहने से हुए घाटे की भरपाई की जा सके।”
भाषा पारुल नरेश
नरेश

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