‘डीपफेक’ और भ्रामक सूचनाएं लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा: बिरला

‘डीपफेक’ और भ्रामक सूचनाएं लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा: बिरला

‘डीपफेक’ और भ्रामक सूचनाएं लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा: बिरला
Modified Date: February 20, 2026 / 07:59 pm IST
Published Date: February 20, 2026 7:59 pm IST

नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ‘डीपफेक’ और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग सत्य और विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने के लिए किया जाना चाहिए।

उन्होंने लोकतांत्रिक विमर्श को भ्रम और दुष्प्रचार से सुरक्षित रखने के लिए तकनीकी प्रगति के साथ-साथ ठोस सुरक्षा उपाय विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

बिरला ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के अंतर्गत “एआई फॉर डेमोक्रेसी” नामक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि एआई में लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की अपार क्षमता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र का मार्गदर्शक सिद्धांत सदैव “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” रहा है और भारत अपने शाश्वत सभ्यतागत मूल्यों के अंतर्गत वैश्विक कल्याण की भावना के साथ कार्य करता है।

विधायी कार्यप्रणाली में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि एआई लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण साधन बनकर उभर रहा है।

उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि “डिजिटल संसद” जैसी पहल नागरिकों और संसद के बीच संवाद को सरल बना रही हैं।

बिरला ने कहा कि भारत की एआई रणनीति समावेशी विकास के सिद्धांत पर आधारित है; और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा कृषि जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में देश की प्रगति को तीव्र करेगा।

भाषा हक हक वैभव

वैभव


लेखक के बारे में