दिल्ली की अदालत ने शिशु तस्करी मामले में आरोपी को जमानत देने से इनकार किया
दिल्ली की अदालत ने शिशु तस्करी मामले में आरोपी को जमानत देने से इनकार किया
नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने अंतर-राज्यीय बाल तस्करी गिरोह में शामिल होने के आरोपी एक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि नवजात शिशुओं की तस्करी एक ‘‘जघन्य अपराध’’ है जो सभ्य समाज की नैतिक चेतना पर प्रहार करती है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी मामले में आरोपी राजकुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। राजकुमार एक अविवाहित बलात्कार पीड़िता की नवजात बच्ची की तस्करी के मामले में आरोपी है।
अदालत ने तीन अगस्त के आदेश में कहा, ‘‘बच्चों की तस्करी एक जघन्य अपराध है और सभ्य समाज की नैतिक चेतना पर प्रहार है। यह अदालत बच्चों की तस्करी और शिशुओं को सामान की तरह बेचने की समस्या पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करती है।’’
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘बच्चे हमारे सामूहिक समाज के सबसे कमजोर लेकिन कीमती सदस्य हैं, और उनके जीवन, आजादी और सम्मान को व्यावसायिक बाजार का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।’’
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब महिलाओं और बच्चों के लिए बनी विशेष पुलिस इकाई को नवंबर 2023 में सफदरजंग अस्पताल में 18 वर्षीय बलात्कार पीड़िता की नवजात बच्ची को अवैध रूप से गोद लेने और तस्करी के बारे में जानकारी मिली।
अस्पताल के एक सहायक ने कथित तौर पर पीड़िता के परिवार को पैसे के बदले बच्ची को देने के लिए मनाया, जिसके बाद पीड़िता के चाचा को यूपीआई के जरिए 50,000 रुपये दिए गए।
जांच में पाया गया कि बच्ची राजकुमार और उसकी पत्नी सुनीता उर्फ सोनिया तक पहुंचने से पहले कई आरोपियों के हाथों से गुजारी। इस दंपति ने कथित तौर पर बच्ची को एक दिन अपने पास रखा और फिर 1.65 लाख रुपये में एक अन्य आरोपी को बेच दिया। इसके बाद बच्ची को कथित तौर पर 1.75 लाख रुपये में आगे बेच दिया गया।
पुलिस ने यह भी दावा किया कि इस साल फरवरी में तस्करी की गई दो अन्य बच्चियों को मुंबई से बचाया गया था, जबकि एक बच्ची की बीमारी के कारण मौत हो गई। हालांकि, शिकायतकर्ता की नवजात बेटी का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
अदालत ने गौर किया कि तीन सह-आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया गया है।
भाषा शफीक नरेश
नरेश

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