दिल्ली के डॉक्टरों ने युवा में हृदय रोग के बढ़ते खतरे के प्रति चेतावनी दी

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दिल्ली के डॉक्टरों ने युवा में हृदय रोग के बढ़ते खतरे के प्रति चेतावनी दी

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  • Publish Date - February 26, 2026 / 09:48 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 09:48 PM IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) दिल्ली के डॉक्टरों ने युवाओं में हृदय रोग के बढ़ते मामलों के प्रति बृहस्पतिवार को चेतावनी देते हुए, प्रारंभिक जांच और निवारक हृदय परीक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। एक बयान में यह जानकारी दी गई है।

यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब महाजन इमेजिंग एंड लैब्स ने बताया कि 2024 से 2025 के बीच ‘कैल्शियम स्कोरिंग सीटी स्कैन’ की संख्या में साल-दर-साल 85 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, उन्नत हृदय जांच की संख्या में भी 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

डायग्नोस्टिक कंपनी ने यह आंकड़े ‘यंग हार्ट्स एट रिक्स: दि केस फॉर अर्ली कार्डिएक स्क्रीनिंग’ नाम के ऑनलाइन सम्मेलन के दौरान साझा किए। इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में हृदय रोग अब कम उम्र के लोगों में भी तेजी से दिखाई देने लगा है और मरीजों के उम्र के पैटर्न में साफ बदलाव दिख रहा है।

बयान के अनुसार, भारत में दिल के दौरे के 25 प्रतिशत से अधिक मामले अब 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में हो रहे हैं, जबकि अचानक ‘कार्डियक अरेस्ट’ के करीब 15 से 20 प्रतिशत मामले 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में दर्ज किए जा रहे हैं।

मेदांता अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के अध्यक्ष डॉक्टर प्रवीण चंद्र ने कहा कि विभिन्न जांचों के जरिए समय रहते खतरे का आकलन किया जाए तो दिल की मांसपेशियों को लंबे समय तक होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बयान में यह भी कहा गया है कि कोलेस्ट्रॉल परीक्षण कराने वाले लगभग 20-21 प्रतिशत व्यक्तियों में लिपिड का स्तर असामान्य पाया गया। ईसीजी, ‘स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राफी’ और ‘ट्रेडमिल’ परीक्षण जैसी निवारक हृदय संबंधी जांचों में भी वृद्धि हुई है।

भाषा नोमान नोमान माधव

माधव