दिल्ली सरकार ने कुष्ठ रोग को अधिसूचित बीमारी घोषित करने का फैसला किया
दिल्ली सरकार ने कुष्ठ रोग को अधिसूचित बीमारी घोषित करने का फैसला किया
नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) दिल्ली सरकार ने कुष्ठ रोग को दिल्ली महामारी रोग अधिनियम के तहत अधिसूचित रोग घोषित करने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में निगरानी को मजबूत करना, शीघ्र निदान सुनिश्चित करना और उपचार में सुधार लाना है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और अब इसकी अधिसूचना जारी होने का इंतजार है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अधिसूचित होने के बाद, अस्पतालों, क्लीनिकों और व्यक्तिगत चिकित्सकों को जिला कुष्ठ रोग अधिकारी को मामलों की रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। इससे प्रभावी निगरानी, लक्षित हस्तक्षेप, रोग की शीघ्र पहचान और मानक ‘मल्टी-ड्रग थेरेपी’ (एमडीटी) के जरिए तत्काल उपचार सुनिश्चित हो सकेगा। यह सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निःशुल्क रूप से उपलब्ध है।
इस कदम के साथ ही दिल्ली, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगी, जो पहले ही कुष्ठ को अधिसूचित रोग घोषित कर चुके हैं।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस कदम से रिपोर्ट न होने वाले मामलों की पहचान करने, संक्रमण को फैलने से रोकने और यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि सभी मरीजों को सम्मान के साथ मानक उपचार मिले।
उन्होंने कहा, “वर्ष 2030 तक इसके संचरण को पूरी तरह से रोकने की दिशा में यह एक बेहद ही महत्वपूर्ण कदम है, जो ‘कुष्ठ-मुक्त दिल्ली’ और विकसित भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार अधिनियम, 1991 के तहत अनुमोदन प्राप्त होने के बाद अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। विस्तृत रिपोर्टिंग प्रारूप और दिशानिर्देश राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के सभी स्वास्थ्य संस्थानों और चिकित्सकों के साथ साझा किए जाएंगे।
बयान के मुताबिक, भारत ने 2005 में राष्ट्रीय स्तर पर कुष्ठ रोग को जन-स्वास्थ्य समस्या के रूप में खत्म करने का लक्ष्य हासिल कर लिया था। फिर भी दुनिया भर में हर साल सामने आने वाले कुष्ठ रोग के नए मामलों में से लगभग 59 फीसदी मामले भारत से होते हैं।
इसमें कहा गया है कि हाल में पूरे भारत में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि कुष्ठ रोग के 44.1 फीसदी मरीज़ों का इलाज निजी स्वास्थ्य केंद्रों में होता है और उनकी जानकारी ‘राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम’ को नहीं दी जाती।
भाषा नोमान
नोमान नरेश
नरेश

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