दिल्ली उच्च न्यायालय के पास जिमखाना क्लब परिसर के अधिग्रहण को रोकने का अधिकार नहीं : केंद्र

दिल्ली उच्च न्यायालय के पास जिमखाना क्लब परिसर के अधिग्रहण को रोकने का अधिकार नहीं : केंद्र

दिल्ली उच्च न्यायालय के पास जिमखाना क्लब परिसर के अधिग्रहण को रोकने का अधिकार नहीं : केंद्र
Modified Date: July 28, 2026 / 09:32 pm IST
Published Date: July 28, 2026 9:32 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थायी लीज समाप्त किए जाने और संपदा अधिकारी द्वारा बेदखली के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा है कि उसके पास दिल्ली जिमखाना क्लब की जमीन को सरकार को अपने कब्जे में लेने से रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना ने याचिका दायर कर इस कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। याचिका के जवाब में सरकार ने कहा कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जेदारों को बेदखल करना) अधिनियम के तहत बेदखली से संबंधित कोई भी मुकदमा या कार्यवाही दीवानी अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। साथ ही, सरकार ने कहा कि सम्पदा अधिकारी की किसी भी कार्रवाई के संबंध में किसी भी प्रकार का व्यादेश दिए जाने पर भी रोक है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील ने अदालत को सूचित किया कि उन्हें कल देर रात ही जवाब मिला है और वे इसका जवाब दाखिल करेंगे। इस पर, न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन ने मंगलवार को खुराना के मुकदमे और जिमखाना क्लब के कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई तीन सितंबर के लिए तय कर दी।

वादी के वरिष्ठ वकील ने अदालत से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया कि क्या केंद्र का यह आश्वासन अब भी लागू है कि इस बीच संपदा अधिकारी के सामने सुनवाई टाल दी जाएगी, इस पर अदालत ने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर।’’

अपने जवाब में केंद्र ने कहा कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जेदारों को बेदखल करना) अधिनियम (पीपी अधिनियम) की अपनी न्यायिक और अपीलीय व्यवस्था है और खुराना की याचिका गलत धारणा पर आधारित, अनुचित और कानून द्वारा प्रतिबंधित होने के कारण खारिज किए जाने योग्य है, खासकर इसलिए क्योंकि संपदा अधिकारी के ‘कारण बताओ नोटिस’ (एससीएन) जारी करने के अधिकार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

स्थायी वकील आशीष दीक्षित के माध्यम से दाखिल अपने जवाब में केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि यह ‘‘अनिवार्य अधिग्रहण’’ का मामला नहीं है, क्योंकि स्थायी लीज में स्वयं ‘‘स्पष्ट और निर्विवाद रूप से’’ यह अधिकार सुरक्षित रखा गया है कि सरकार समझौते को समाप्त कर सकती है और ‘‘सार्वजनिक उद्देश्य’’ के लिए परिसर को दोबारा कब्जे में ले सकती है।

भाषा सुरभि दिलीप

दिलीप


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