दिल्ली उच्च न्यायालय ने अयोग्य घोषित अभ्यर्थी को ‘जेईई एडवांस’ 2026 में बैठने की अनुमति दी

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अयोग्य घोषित अभ्यर्थी को ‘जेईई एडवांस’ 2026 में बैठने की अनुमति दी

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अयोग्य घोषित अभ्यर्थी को ‘जेईई एडवांस’ 2026 में बैठने की अनुमति दी
Modified Date: April 28, 2026 / 09:49 pm IST
Published Date: April 28, 2026 9:49 pm IST

नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उस अभ्यर्थी को संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई)-एडवांस 2026 में शामिल होने की अनुमति दी, जिसे अधिकारियों ने इस आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया था कि उसने पिछले वर्ष एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में सीट स्वीकार कर ली थी।

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने याचिकाकर्ता को इस परीक्षा के लिए पंजीकरण करने की अनुमति दी और आयोजक को एक सप्ताह के भीतर उसे प्रवेश-पत्र जारी करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘आप इस संस्थान का महत्व नहीं समझते। यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है। बच्चे पहली कक्षा से ही आईआईटी में प्रवेश पाने का सपना देखते हैं। यह बच्चों का सपना होता है और मैं इसे नजरअंदाज नहीं कर सकता।’’

अदालत ने अधिकारियों की ओर से पेश वकील से मौखिक रूप से कहा, ‘‘आप राष्ट्रीय संसाधनों के जाने की बात करते हैं। यह छात्र कल किसी अमेरिकी विश्वविद्यालय में प्रवेश ले सकता है। इससे प्रतिभा पलायन होगा। आपको इस छात्र को प्रवेश देना चाहिए। यह आपका ही मानव संसाधन है। मैं इस याचिका को आपकी सुविधा अनुसार सुनूंगा, लेकिन आज ही इसे प्रवेश-पत्र दूंगा।’’

अदालत ने आदेश दिया, ‘‘याचिकाकर्ता को 17 मई 2026 को प्रस्तावित परीक्षा ‘जेईई-एडवांस 2026’ में शामिल होने के लिए आज से एक सप्ताह के भीतर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रवेश-पत्र दिया जाए।’’

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाती, तो उसकी याचिका निरर्थक हो जाएगी, और यदि वह मामला हार जाता है तब भी उसकी परीक्षा को अमान्य घोषित किया जा सकता है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील तन्वी दुबे ने बताया कि उसने 2025 की जेईई (मेंस) उत्तीर्ण की थी और जेईई (एडवांस) 2025 के लिए पात्र हुआ था, लेकिन उसने किसी भी संस्थान में प्रवेश नहीं लिया।

अदालत ने कहा कि उसका प्रथम दृष्टया मत यह है कि सीट की अंतिम पुष्टि इस बात पर निर्भर थी कि याचिकाकर्ता पात्रता की शर्तें पूरी करता है या नहीं, लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

याचिका में कहा गया कि अधिकारियों का निर्णय स्पष्ट रूप से मनमाना, अविवेकपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करने वाला है।

भाषा सुरेश माधव

माधव


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