दिल्ली होटल अग्निकांड : अफ्रीकी दंपति को मौत भी एक-दूसरे से जुदा नहीं कर सकी
दिल्ली होटल अग्निकांड : अफ्रीकी दंपति को मौत भी एक-दूसरे से जुदा नहीं कर सकी
(सौम्या शुक्ला)
नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) दिल्ली के एक अस्पताल में आईवीएफ की प्रक्रिया से गुजर रहे अफ्रीकी दंपति को मौत भी एक-दूसरे से जुदा नहीं कर सकी। दोनों ने मालवीय नगर में आग की चपेट में आए होटल में धुएं के कारण दम घुटने की वजह से एक-दूसरे की बाहों में दम तोड़ दिया।
हौज रानी स्थित ‘फ्लरिश स्टे बी एंड बी’ होटल में बुधवार को लगी भीषण आग में 12 विदेशी नागरिकों सहित कुल 21 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक अफ्रीकी दंपति भी शामिल है, जिनके शव इमारत के भूतल पर स्थित एक बाथरूम के अंदर बरामद हुए। माना जा रहा है कि दंपति ने आग की लपटों से बचने के लिए बाथरूम में शरण ली थी, लेकिन धुएं के कारण दम घुटने की वजह से उनकी मौत हो गई।
दंपति से परिचित मैक्स स्मार्ट अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि दोनों संतान सुख पाने के लिए ‘इन विट्रो फर्टिलाइजेशन’ (आईवीएफ) की प्रक्रिया से गुजर रहे थे और उन्होंने पास में स्थित ‘फ्लरिश स्टे बी एंड बी’ होटल में ठहरने का फैसला किया था।
घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले लोगों में शामिल अस्पताल के ड्यूटी प्रभारी वसीम रजा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में उस दृश्य को प्रेम की ऐसी मिसाल करार दिया, जो ताजमहल से भी बढ़कर है।
रजा ने कहा, “हमने किसी तरह बाथरूम का दरवाजा खोला और अंदर जो देखा, उसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। मैंने अपने करियर में कई शव देखे हैं, लेकिन वहां के मंजर ने मुझे झकझोरकर रख दिया।”
रजा के मुताबिक, हाल में एक चिकित्सीय प्रक्रिया से गुजरी महिला टॉयलेट सीट पर, जबकि उसका पति बगल में एक कुर्सी पर बैठा हुआ था।
उन्होंने बताया, “दोनों एक-दूसरे को पकड़े हुए थे। उन्होंने एक-दूसरे को बाहों में लपेट रखा था। महिला का सिर उसके पति के कंधे पर टिका हुआ था।”
रजा के अनुसार, “बचावकर्मियों ने तुरंत दंपति की नब्ज जांची और सीपीआर सहित अन्य जीवनरक्षक उपाय देने की कोशिश की। लेकिन दोनों ने कोई हरकत नहीं की। उनकी मौत संभवतः धुएं के कारण दम घुटने से हुई।”
उन्होंने कहा कि घटनास्थल के दृश्य को देखकर लग रहा था कि जिंदगी के अंतिम पलों में भी दंपति ने एक-दूसरे की बाहों में सुकून तलाशने की कोशिश की।
रजा ने कहा, “जब मौत करीब नजर आ रही थी, तो दोनों ने एक-दूसरे की बाहों में उसका सामना करने का फैसला किया। यह एक ऐसा दृश्य था, जो मेरे जहन में हमेशा रहेगा।”
होटल के पास रहने वाले स्थानीय कैब संचालक इकरार ने बताया कि इलाके के कई चालक दंपति को जानते थे, क्योंकि दोनों का इलाज के सिलसिले में अक्सर होटल से अस्पताल आना-जाना होता था।
इकरार ने कहा, “वे आईवीएफ की प्रक्रिया से गुजर रहे थे। इलाके के चालक अक्सर उन्हें अस्पताल ले जाते और वापस लाते थे। वे परिवार बढ़ाने की उम्मीद से यहां आए थे।”
भाषा पारुल वैभव
वैभव

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