दिल्ली: कर्मचारी की हत्या के विरोध में ‘ऑटो-टिपर’ सेवा बंद रखेंगे सफाईकर्मी

दिल्ली: कर्मचारी की हत्या के विरोध में ‘ऑटो-टिपर’ सेवा बंद रखेंगे सफाईकर्मी

दिल्ली: कर्मचारी की हत्या के विरोध में ‘ऑटो-टिपर’ सेवा बंद रखेंगे सफाईकर्मी
Modified Date: August 16, 2026 / 10:08 pm IST
Published Date: August 16, 2026 10:08 pm IST

नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) दिल्ली सफाई कर्मचारी संघ के सदस्य सोमवार से कूड़ा उठाने वाले छोटे वाहन यानी ‘ऑटो-टिपर’ को सड़कों पर नहीं उतारेंगे।

सफाईकर्मी अपने साथी की चाकू मारकर हत्या करने के आरोपी की गिरफ्तारी, उसके परिवार को मुआवजा और उसके किसी एक परिजन को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे हैं।

संघ के सदस्यों ने कहा कि वे दिल्लीभर में ‘ऑटो-टिपर’ नहीं उतारेंगे और सोमवार को प्रदर्शन भी करेंगे। संघ के सदस्य करण सिंह महरोलिया ने कहा, “अगर मृतक सफाईकर्मी के परिवार के किसी सदस्य को नौकरी नहीं दी गई या आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो हम कल (सोमवार से) से दिल्लीभर में ‘ऑटो-टिपर’ सेवा बंद रखेंगे।”

उन्होंने कहा कि शोकाकुल परिवार को मुआवजा दिए जाने के बाद ही ‘ऑटो-टिपर’ सेवा दोबारा शुरू की जाएगी।

अनिल (27) दिल्ली नगर निगम के लिए एक निजी कंपनी के माध्यम से अनुबंध पर सफाई कर्मचारी के रूप में काम करता था।

रविवार को पूर्वी दिल्ली के कल्याणपुरी में कथित तौर पर चाकू से वार कर उसकी हत्या कर दी गई, जिसके बाद यह विरोध प्रदर्शन हुआ।

पुलिस के अनुसार, अनिल पर चाकू से हमला किया गया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

पुलिस ने बताया कि उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस आरोपी की पहचान करने और हत्या के पीछे की वजह पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य सबूतों की जांच कर रही है।

अनिल के परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरुआत में उन्हें बताया था कि वह दुर्घटना का शिकार हुआ है लेकिन मौके पर परिवार को पता चला कि उसे कथित तौर पर चाकू मारा गया था।

परिवार ने बताया कि अनिल की किसी से कोई ज्ञात दुश्मनी नहीं थी।

इसके बाद कई सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में धरना दिया। दिल्ली नगर निगम ने कहा कि अनिल के परिवार को मुआवजा दिया जाएगा।

निगम के प्रतिनिधियों ने परिवार से मुलाकात कर उन्हें भरोसा भी दिलाया। अधिकारियों ने बताया कि रविवार शाम तक कर्मचारी के शव को पोस्टमार्टम के लिए नहीं ले जाया गया था।

भाषा जितेंद्र प्रशांत

प्रशांत


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