उप्र सरकार से ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया निर्धारित करने की मांग

उप्र सरकार से ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया निर्धारित करने की मांग

उप्र सरकार से ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया निर्धारित करने की मांग
Modified Date: March 28, 2026 / 02:59 pm IST
Published Date: March 28, 2026 2:59 pm IST

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन महीने से अधिक समय पहले पर्यावरणीय मंजूरी को अनिवार्य बनाने का आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए इसे प्राप्त करने की कोई ठोस व्यवस्था अब तक नहीं की है।

राज्य सरकार ने 16 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी कर ईंट-भट्ठों के लिए मिट्टी खोदने जैसी खनन गतिविधियों की खातिर पर्यावरणीय मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया था। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार ने इसके लिए आवेदन करने की कोई व्यवस्था न तो ऑनलाइन और न ही ऑफलाइन की है।

इस संबंध में संपर्क किए जाने पर खनन विभाग की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

वहीं, ईंट-भट्ठा संचालकों का कहना है कि वे पहले से ही जल और वायु गुणवत्ता मानकों के पालन के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेते हैं। इसके अलावा, वे खनन विभाग को नियामक शुल्क भी अदा करते हैं।

एक भट्ठा संचालक ने कहा, “इसके बावजूद अगर राज्य पर्यावरण विभाग से भी मंजूरी लेनी पड़े, तो हमें कोई आपत्ति नहीं है-बशर्ते प्रक्रिया सरल हो और उसमें बिचौलियों की भूमिका न हो।”

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने बताया कि 2020 से पहले ईंट-भट्ठा संचालक पर्यावरणीय मंजूरी के लिए आवेदन करते थे। हालांकि, एक मई 2020 की राज्य सरकार की अधिसूचना में “दो मीटर तक की गहराई तक सामान्य मिट्टी की खुदाई” को पर्यावरणीय मंजूरी से छूट दे दी गई। इसके बाद से भट्ठा संचालकों के लिए ऐसी मंजूरी लेना आवश्यक नहीं रहा।

इस मुद्दे पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में जनहित याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता राजीव कुमार बाजपेयी ने कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा छूट दिए जाने के बाद बिहार सरकार ने भी इसी तरह की अधिसूचना जारी की थी, लेकिन पटना उच्च न्यायालय ने सात मार्च 2024 को उसे रद्द कर दिया।”

उन्होंने बताया कि इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को उच्चतम न्यायालय ने 22 जुलाई 2024 को खारिज कर दिया। इसके बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने नौ अगस्त 2024 को सभी राज्यों को पटना उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने की सलाह दी।

बाजपेयी ने कहा, “केंद्र सरकार की सलाह के बावजूद जब उत्तर प्रदेश सरकार ने यह छूट वापस नहीं ली, तो मैंने अगस्त 2025 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में जनहित याचिका दायर की।”

उन्होंने कहा, “मैंने अदालत से राज्य सरकार को आदेश का पालन कराने का अनुरोध किया था। हालांकि, माननीय न्यायालय के किसी भी तरह के निर्देश देने से पहले ही राज्य सरकार ने 16 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी कर सभी ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए पर्यावरणीय मंजूरी अनिवार्य कर दी।”

वहीं, 2015 से ईंट-भट्ठा संचालकों से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों पर काम कर रहे अधिवक्ता अरविंद कुमार राय ने भी बाजपेयी की चिंताओं को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि सरकार के आदेश जारी होने के तीन महीने बाद भी राज्य में मंजूरी की प्रक्रिया अब तक लागू नहीं हो सकी है।

भाषा

खारी अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में