रास में उठी शैक्षिक संस्थानों में प्रति सौ छात्रों पर एक मनोवैज्ञानिक नियुक्त करने की मांग

रास में उठी शैक्षिक संस्थानों में प्रति सौ छात्रों पर एक मनोवैज्ञानिक नियुक्त करने की मांग

रास में उठी शैक्षिक संस्थानों में प्रति सौ छात्रों पर एक मनोवैज्ञानिक नियुक्त करने की मांग
Modified Date: March 25, 2026 / 03:56 pm IST
Published Date: March 25, 2026 3:56 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) सभी शैक्षणिक संस्थानों में प्रति 100 बच्चों पर एक मनोवैज्ञानिक की नियुक्ति करने की मांग करते हुए राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी के राधामोहन दास अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि प्रतिस्पर्धा की वजह से बच्चों पर गहरा दबाव पड़ता है।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए अग्रवाल ने कहा कि बच्चों को आदर्श नागरिक बनाने में अभिभावकों और शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। ‘‘लेकिन दबाव इस बात पर होता है कि बच्चे कितने नंबर लाते हैं। सबसे अधिक नंबर नहीं मिलने पर बच्चा दबाव में आ जाता है और कई मानसिक समस्याओं का शिकार हो जाता है।’’

उन्होंने कहा कि नंबरों की भागदौड़ में पढ़ाई की गुणवत्ता खत्म होती जा रही है। बच्चे पर घर में, स्कूल में और कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई कर अधिक नंबर लाने का दबाव होता है।

उनके अनुसार, एक वैज्ञानिक अध्ययन बताता है कि आज देश के 70.3 फीसदी बच्चे तनाव के, 69.9 फीसदी छात्र उच्च स्तरीय उद्विग्नता के, 65.5 फीसदी बच्चे ‘लॉस ऑफ बिहेवियरल और इमोशनल कंट्रोल’ के और 59 फीसदी बच्चे अवसाद के शिकार हैं।

अग्रवाल के अनुसार, ‘‘चीन ने अपने यहां अलग व्यवस्था की। वहां 2021 से बच्चे घर जा कर केवल पढ़ाई में ही नहीं उलझते। वहां कोई कोचिंग स्कूल उन विषयों की कोचिंग नहीं देता जो विषय स्कूल में पढ़ाए जाते हैं। हमारे यहां ऐसी व्यवस्था नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि हमारे यहां स्कूलों में मानसिक इलाज की भी व्यवस्था नहीं है। उनके अनुसार, 2022 में टेलीमेडिसिन हेल्थ कार्यक्रम शुरू किया था और तीन साल के अंदर 19 लाख 58 हजार से अधिक समस्याएं आईं। ‘‘मानसिक रोगों का इलाज टेलीमेडिसिन से नहीं हो सकता।’’

अग्रवाल ने मांग की कि सभी शैक्षणिक संस्थानों में 100 छात्रों पर एक मनो वैज्ञानिक चिकित्सक की नियुक्ति की जाए तथा शिक्षकों को बाल मनोविकारों के बारे में जानकारी दी जाए ताकि वे छात्रों की समस्याएं समझ सकें।

भाजपा के ही बालयोगी उमेशनाथ ने कहा कि हर दिन उज्जैन की अवन्तिका नगरी में करीब पांच लाख लोग महाकाल के दर्शन करने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि महाकाल के मंदिर में विशेष भस्म आरती होती है और लाखों लोग वहां आते हैं। ‘‘ऐसे में वहां सुरक्षा बहुत जरूरी है।’’

उन्होंने कहा कि चार से पांच लाख लोगों का हर दिन उज्जैन की अवन्तिका नगरी में आगमन होता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में कुंभ का मेला लगने जा रहा है और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी।

उमेशनाथ ने कहा कि अवन्तिका नगरी और महाकाल के मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा अभी स्थानीय पुलिस, होमगार्ड और निजी सुरक्षा कर्मियों पर है लेकिन सीआरपीएफ की तैनाती जरूरी है।

उन्होंने सरकार से वहां एआई आधारित प्रणालियों की व्यवस्था करने और एनडीआरएफ का एक स्थायी सुरक्षा केंद्र स्थापित करने की मांग की।

भाजपा की ही गीता उर्फ चंद्रप्रभा ने कहा कि अवसंरचना विकास के तहत सड़कें, राजमार्ग, नेशनल एक्सप्रेस वे आदि बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई एक्सप्रेस वे कृषि क्षेत्रों से हो कर गुजरते हैं जिनके किनारे किसान मंडियां बनाई जानी चाहिए ताकि किसानों को भी लाभ मिल सके।

मनोनीत सदस्य डॉ मीनाक्षी जैन ने लुप्त होती धरोहरों, स्मारकों का मुद्दा उठाया और सरकार से मांग की कि इनके बारे में जागरुकता अभियान चलाया जाए तथा इन्हें पुनर्जीवित किया जाए।

एक अन्य मनोनीत सदस्य हर्षवर्द्धन शृंगला ने जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो प्रजातियां लुप्त हो रही हैं, वह हमें कभी नहीं मिलेंगी इसलिए जैव विविधता तथा उसके लिए पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण बेहद जरूरी है।

भाजपा की रेखा शर्मा ने सीएसआर पहलों के महत्व का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह महिला सशक्तिकरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है लेकिन इसके तहत महिलाओं को जो प्रशिक्षण दिया जाता है उसमें कोई कसर न रहे, इसका ध्यान रखना चाहिए।

शून्यकाल में ही आम आदमी पार्टी के संत बलबीर सिंह, द्रमुक सदस्य पी विल्सन और भाजपा की धर्मशीला गुप्ता ने भी अपने अपने मुद्दे उठाए।

भाषा

मनीषा माधव

माधव


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