तृणमूल की धमकियों के बावजूद सीएपीएफ की मौजूदगी के कारण लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान किया: अधीर

तृणमूल की धमकियों के बावजूद सीएपीएफ की मौजूदगी के कारण लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान किया: अधीर

तृणमूल की धमकियों के बावजूद सीएपीएफ की मौजूदगी के कारण लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान किया: अधीर
Modified Date: April 29, 2026 / 05:19 pm IST
Published Date: April 29, 2026 5:19 pm IST

मुर्शिदाबाद, 29 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार को कहा कि जो तृणमूल कांग्रेस ‘‘डर और तनाव का माहौल’’ पैदा करने के लिए जानी जाती है उसके इस तरह के प्रयासों के बावजूद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दोनों चरणों में लोग बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए बाहर आए और इसमें केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने मदद की।

राज्य के विभिन्न इलाकों में मौजूदा चरण के दौरान छिटपुट हिंसा की खबरों पर एक सवाल के जवाब में चौधरी ने बहरामपुर में पत्रकारों से कहा कि चुनाव से संबंधित हिंसा की घटनाएं पिछले स्थानीय निकाय चुनाव की तुलना में काफी कम हैं।

मुर्शिदाबाद जिले के बहरामपुर से कांग्रेस उम्मीदवार ने कहा, ‘‘हमें सत्तारूढ़ दल द्वारा प्रायोजित हिंसा की ऐसी घटनाओं की आशंका थी। पश्चिम बंगाल में हिंसा-मुक्त चुनाव की कल्पना करना असंभव है। लोग बड़ी संख्या में मतदान कर रहे हैं क्योंकि उन्हें केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी से भरोसा मिल रहा है। फिर भी, मतदान केंद्रों के बाहर घटनाएं हो रही हैं जिन्हें तृणमूल द्वारा अंजाम दिया जा रहा है और जिन पर उनकी छाप साफ दिखती है।’’

बंगाल में हिंसा-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने का आश्वासन देते हुए निर्वाचन आयोग ने 23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के दौरान अर्द्धसैनिक बल की रिकॉर्ड 2,407 कंपनियों की तैनाती की और दूसरे चरण में लगभग 2,500 कंपनियों की तैनाती की गई है। राज्य में दूसरे चरण का मतदान जारी है।

अपराह्न तीन बजे तक राज्य की 142 विधानसभा सीट पर 78.68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

चौधरी ने दावा किया, ‘‘पिछले पंचायत और नगर निकाय चुनाव की तुलना में इस चुनाव में हिंसा में काफी कमी आई है। पंचायत और नगर निकाय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग के तत्वावधान में आयोजित किए जाते हैं जबकि उन चुनावों के विपरीत वर्तमान विधानसभा चुनाव निर्वाचन आयोग की देखरेख में हो रहे हैं। यही कारण है कि लोग मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं और निर्भीक होकर मतदान कर रहे हैं। इससे तृणमूल कांग्रेस घबरा गई है।’’

चौधरी ने कहा कि मतदान के दिन मतदाताओं को डराना-धमकाना, धमकियां देना और चुनाव संबंधी हिंसा की घटनाएं बहुत कम हुई हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव से पहले और चुनाव की तैयारियों के दौरान ये सब इसलिए रचा जाता है ताकि तृणमूल कांग्रेस जमीनी स्तर पर भय और तनाव का माहौल बनाकर अपने चुनावी लक्ष्यों को हासिल कर सके।’’

चौधरी ने कहा कि चुनाव के बाद भी बदले की कार्रवाई के तौर पर हिंसा होती है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘पार्टी के संरक्षण में पलने वाले गुंडे जानते हैं कि चुनाव के दिन सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण उन्हें हिंसा करने के मौके ज्यादा नहीं मिलेंगे।’’

भाषा सुरभि मनीषा

मनीषा


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