देवेगौड़ा ने मोदी को बताया ‘परिपक्व राजनीतिक नेता’ : कहा, उनके कहने से नहीं दिया इस्तीफा
देवेगौड़ा ने मोदी को बताया ‘परिपक्व राजनीतिक नेता’ : कहा, उनके कहने से नहीं दिया इस्तीफा
नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक ‘परिपक्व राजनीतिक नेता’ करार देते हुए कहा कि 2014 में उन्होंने मोदी के कहने पर ही लोकसभा चुनाव जीतने के बाद इस्तीफा देने का अपना निर्णय वापस लिया था।
उच्च सदन में अनुदान की अनुपूरक मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए जनता दल (एस) प्रमुख देवेगौड़ा ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि विकास से ही खपत बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस बात पर ध्यान रखना चाहिए कि प्रधानमंत्री ने यह संदेश किस परिस्थिति में दिया है।
उन्होंने 1971 के युद्ध की याद दिलाते हुए कहा कि इसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़े थे। उन्होंने कहा कि उस समय मिट्टी का तेल 12 रूपये प्रति लीटर और चीनी 18 रूपये प्रति किलोग्राम चली गयी थी।
देवेगौड़ा ने कहा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कर्नाटक की एक सभा में उन पर एवं उनकी पार्टी पर हमला बोला था। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा था कि यदि भाजपा को चुनाव में अपने बूते पर 286 सीटें मिल गयीं और उसने सरकार बना ली तो वह चुनाव से हट जाएंगे और इस्तीफा दे देंगे।
जद(एस) प्रमुख ने कहा कि 2014 में भाजपा को 286 सीटें मिलने के बावजूद मोदी ने कहा कि वह राजग के सभी भागीदारों के साथ मिलकर सरकार बनायेंगे और इससे उनकी ‘राजनीतिक परिपक्वता का पता चलता है।’
उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री के बुलावे पर उनके शपथ ग्रहण समारोह में गये थे और वहीं मोदी ने उन्हें सात रेसकोर्स मार्ग स्थित अपने कार्यालय में मिलने के लिए बुलाया। देवेगौड़ा ने कहा कि वह गोधरा कांड के कारण मोदी के कटु आलोचक रह चुके हैं इसके बावजूद उन्होंने राजनीतिक परिपक्वता दिखाते हुए उन्हें मिलने के लिए बुलाया।
देवेगौड़ा के अनुसार, प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि वह सबसे वरिष्ठ नेता है और उन्हें इस्तीफा नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 से लेकर आज तक वह प्रधानमंत्री मोदी के साथ है और इसके पीछे कोई व्यक्तिगत कारण नहीं है।
उन्होंने कहा कि उन्हें कांग्रेस की मदद से कभी मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया गया किंतु 2018 में उन नेताओं का नाम नहीं बता सकता जिन्हें ‘श्रीमती (सोनिया) गांधी ने मेरे पुत्र (एचडी कुमारस्वामी)’ को मुख्यमंत्री बनाने के लिए संदेश लेकर उनके पास भेजा।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पुत्र को मुख्यमंत्री नहीं बनने के लिए कहा था और 14 माह में उसकी सरकार गिर गयी। फिर उन्होंने अपने पुत्र को प्रधानमंत्री मोदी के साथ जाने को कहा।
जद(एस) प्रमुख ने कहा कि वह सत्ता के भूखे नेता नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र में जब उनकी सरकार गिर रही थी तो भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने उनकी सरकार को बचाने के लिए सर्वोत्तम प्रयास किए।
उन्होंने कहा कि जनता दल (यू) प्रमुख नीतीश कुमार ने उनसे कहा था कि वे अपनी पार्टी जनता दल (एस) का विलय बिहार के मुख्यमंत्री की पार्टी में कर दें किंतु उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया।
राज्यसभा में 18 मार्च को सेवानिवृत्त होने जा रहे सदस्यों को विदाई देते हुए नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने देवेगौड़ा के बारे में कहा था कि उन्होंने मोहब्बत तो कांग्रेस के साथ की, लेकिन शादी (गठबंधन) प्रधानमंत्री मोदी के साथ कर ली। देवेगौड़ा ने कहा कि कांग्रेस ने उनके साथ क्या क्या किया, वह इस बारे में कुछ नहीं बोलना चाहते हैं।
भाषा माधव मनीषा
मनीषा

Facebook


