वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए आर्थिक स्थिरीकरण निधि बनाई गई है: जगदंबिका पाल
वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए आर्थिक स्थिरीकरण निधि बनाई गई है: जगदंबिका पाल
नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद जगदंबिका पाल ने वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों को वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में एक समाधान करार देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ने इसके तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये की एक आर्थिक स्थिरीकरण निधि बनाई है।
वर्ष 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांग के दूसरे बैच पर चर्चा की शुरूआत करते हुए पाल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट (इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध) के कारण पूरे विश्व में अनिश्चितता की स्थिति है।
उन्होंने कहा कि होरमुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति श्रृंखला टूट जाने का असर कच्चा तेल की ढुलाई पर पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन केवल भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसे ईरान ने उस समुद्री मार्ग से तेल की ढुलाई की अनुमति दी है।’’
भाजपा सांसद ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चा तेल के दाम बढ़े हैं और यह 88 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 119 डॉलर हो गया है, जिसका सीधा असर गैस, उर्वरक और परिवहन क्षेत्र पर पड़ेगा। पूरे विश्व में इसका असर पड़ने जा रहा है।
पाल ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में और इस तरह की वैश्विक चुनौती को ध्यान में रखते हुए यह केवल अनुपूरक मांग नहीं है, बल्कि दुनिया के समक्ष उत्पन्न हुए संकट का एक समाधान है।’’
भाजपा सांसद ने कहा कि अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच का कुल आकार 2.81 लाख करोड़ रुपये है और इसमें दो लाख करोड़ रुपये नया नकद व्यय है जो दर्शाता है कि विकास कार्यों को गति दी जाएगी।
उन्होंने उल्लेख किया कि इसमें एक लाख करोड़ रुपये ‘टेक्निकल सप्लीमेंट्री टोकन’ प्रावधान के लिए है।
पाल ने कहा, ‘‘अनुपरक मांगों के दूसरे बैच में, वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला व समाधान करने के लिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक स्थिरीकरण निधि बनाया है, जो मौजूदा संकट को दूर करेगा। यह भविष्य में आने वाले किसी भी संकट के लिए एक ढाल का काम करेगा।’’
उन्होंने कहा कि यह निधि नये वित्त वर्ष के बजट के लिए एक मजबूत नींव रखेगा। यह वित्त वर्ष 2026-27 के बजट के लिए एक बफर का काम करेगा, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का भारत पर असर न पड़े।
विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच, पाल ने कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2013-14 में 304 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो बढ़कर वर्तमान में 686 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है।
उन्होंने यह उल्लेख भी किया कि संप्रग के शासनकाल के दौरान विदेशी निवेश देश से निकाला जा रहा था और यह 308 अरब अमेरिकी डॉलर था, लेकिन वर्तमान में 748 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है, जिसपर विपक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया।
विपक्षी सदस्यों का शोरगुल नहीं थमने पर, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वर्तमान में, विश्व में जिस तरह की समस्या है उसे ध्यान में रखते हुए सबको एकजुट होकर उसका समाधान करना होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘जब कभी देश में संकट आए तो पूरे देश को एकजुट होकर उसका समाधान करना चाहिए, राजनीति नहीं करनी चाहिए।’’
इसके बाद, पाल ने कहा कि देश के किसानों के लिए उर्वरक की आपूर्ति बनाये रखने के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांग के दूसरे बैच में 19,230 करोड़ रुपये उर्वरक सब्सिडी के लिए प्रावधान किया गया है क्योंकि आयात किये जाने वाले प्राकृतिक गैस की लागत दोगुनी हो गई है।
भाषा
सुभाष हक
हक

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