दुनिया में ऊर्जा परिवर्तन उम्मीद के अनुरूप नहीं हो रहा : एनर्जी ट्रांजिशन कमीशन निदेशक

दुनिया में ऊर्जा परिवर्तन उम्मीद के अनुरूप नहीं हो रहा : एनर्जी ट्रांजिशन कमीशन निदेशक

दुनिया में ऊर्जा परिवर्तन उम्मीद के अनुरूप नहीं हो रहा : एनर्जी ट्रांजिशन कमीशन निदेशक
Modified Date: February 28, 2026 / 04:27 pm IST
Published Date: February 28, 2026 4:27 pm IST

(अलिंद चौहान)

नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) एनर्जी ट्रांजिशन कमीशन निदेशक इटा केटलबरो ने कहा है कि दुनिया में जीवाश्म ईंधनों का उपयोग धीरे धीरे कम करने के बीच नवीकरणीय ऊर्जा से बिजली उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन हो सकता है कि इस परिवर्तन की गति उतनी तेज नहीं हो, जितनी उम्मीद की जा रही थी।

केटलबरो ने कहा कि ऐसा स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन ‘लागत में उल्लेखनीय कमी’ के बावजूद है।

एनर्जी ट्रांजिशन कमीशन ब्रिटेन स्थित एक विचार मंच है, जो आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन को कम करने पर ध्यान केंद्रित करता है। यह वर्तमान में एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टीआरआई) के सहयोग से भारत में कृषि क्षेत्र में स्वच्छ बिजली के विस्तार के लिए काम कर रहा है।

केटलबरो ने कहा, ‘स्वच्छ ऊर्जा, विशेष रूप से सौर और पवन ऊर्जा के उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। उदाहरण के लिए, सौर ऊर्जा के मामले में, पिछले 30 वर्षों में लागत में 99 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि, जीवाश्म ईंधन का उपयोग उतनी तेजी से कम नहीं हुआ है, जितनी हमने शायद उम्मीद की थी।’

ऊर्जा क्षेत्र के वैश्विक पेशेवर निकाय एनर्जी इंस्टीट्यूट (ईआई) द्वारा किए गए 2025 के एक विश्लेषण से पता चला है कि जहां अकेले पवन और सौर ऊर्जा में 2024 में प्रभावशाली 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं जीवाश्म ईंधन के कुल उपयोग में एक प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जो ऊर्जा परिवर्तन की धीमी प्रगति को उजागर करता है।

जीवाश्म ईंधनों के निरंतर उपयोग के परिणामस्वरूप हर साल रिकॉर्ड तोड़ उत्सर्जन हो रहा है। उदाहरण के लिए, ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट के एक अध्ययन के अनुसार, जीवाश्म ईंधनों से वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 2025 तक 1.1 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है – जो एक रिकॉर्ड उच्च स्तर होगा।

केटलबरो ने कहा, ‘‘हालांकि अब हमारे पास स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियां हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सही मायने में सामना करने के लिए, हमें इनकी आवश्यकता 20 साल पहले, शायद उससे भी पहले थी। हम अभी भी इन प्रौद्योगिकियों को लागू करने की आवश्यक गति हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं… मुझे विश्वास है कि हम सदी के अंत तक उस गति तक पहुंच जाएंगे, लेकिन हमें उससे कहीं अधिक तेजी से वहां पहुंचने की आवश्यकता है।’’

भाषा अमित दिलीप

दिलीप


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