मोबाइल ऐप पर अश्लील सामग्री के कारण पूरी पीढ़ी को बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता: उच्च न्यायालय
मोबाइल ऐप पर अश्लील सामग्री के कारण पूरी पीढ़ी को बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता: उच्च न्यायालय
नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को गूगल और एप्पल को अपने ऑनलाइन मंचों पर मौजूद मोबाइल एप्लिकेशन के जरिये अश्लील सामग्री के प्रसार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि वह पूरी पीढ़ी को ‘‘बर्बाद’’ होने की अनुमति नहीं दे सकता।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि वर्तमान कानूनी ढांचे में, सोशल मीडिया मध्यस्थों को ‘‘सबसे महत्वपूर्ण भूमिका’’ निभानी होगी और उन्हें न केवल शिकायत मिलने पर, बल्कि अश्लील सामग्री अपलोड करते समय भी कार्रवाई करनी चाहिए।
इसके अलावा, इसने केंद्र की ‘इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम’ को इस तरह की सामग्री के प्रसार की जांच करने के लिए भी कहा।
अदालत गूगल और एप्पल द्वारा संचालित मंचों पर मौजूद मोबाइल एप्लिकेशन के जरिये अश्लील सामग्री पेश किये जाने के खिलाफ रुबिका थापा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
अदालत ने कहा, ‘‘हम देश की पूरी पीढ़ी को बर्बाद नहीं होने दे सकते। हम (संविधान के) अनुच्छेद 19 के तहत सभी प्रकार की स्वतंत्रता को समझते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हम अश्लील सामग्री के प्रसार की अनुमति दें।’’
इसने कहा, ‘‘हम अपेक्षा करते हैं कि रिट याचिका में किए गए आरोपों/उल्लेखों को ध्यान में रखते हुए, प्रतिवादी संख्या दो, तीन और चार (गूगल एलएलसी, एप्पल इंक. और इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम) सख्ती से कार्रवाई करेंगे, ताकि ऐसे वीडियो के प्रसार पर तुरंत रोक लगाई जा सके और 2021 के आईटी नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जा सके।’’
अदालत ने जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, गूगल एलएलसी, एप्पल और सीईआरटी-इन को भी नोटिस जारी किया और इन मंचों से की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट मांगी।
याचिकाकर्ता के वकील, एडवोकेट तन्मय मेहता ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आपत्तिजनक मोबाइल एप्लिकेशन बच्चों के लिए आसानी से उपलब्ध थे और उनके संचालन के माध्यम से लाखों डॉलर कमाए जा रहे थे।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि इस खतरे पर अंकुश लगाना होगा और ऑनलाइन मंच से अधिक जवाबदेही की मांग की।
याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में कहा कि कई मोबाइल एप्लिकेशन उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने और बनाए रखने के इरादे से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधानों का घोर उल्लंघन कर रही थी।
मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।
भाषा देवेंद्र सुरेश
सुरेश

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