एनसीआर योजना 2041 में ‘प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र’ शब्द बरकरार रखने का पर्यावरणविदों ने स्वागत किया

एनसीआर योजना 2041 में 'प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र’ शब्द बरकरार रखने का पर्यावरणविदों ने स्वागत किया

एनसीआर योजना 2041 में ‘प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र’ शब्द बरकरार रखने का पर्यावरणविदों ने स्वागत किया
Modified Date: June 8, 2026 / 06:49 pm IST
Published Date: June 8, 2026 6:49 pm IST

नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) पर्यावरणविदों ने एनसीआर क्षेत्रीय योजना-2041 में पर्यावरण सुरक्षा उपायों को बरकरार रखने का स्वागत किया है। यह जल्द ही 2021 की योजना की जगह लेगी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास की नयी रूपरेखा तय करेगी।

इससे पहले, वर्ष 2021 की एनसीआर क्षेत्रीय योजना में ‘प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र’ (एनसीजेड) शब्द का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन 2022 में जारी ‘एनसीआर क्षेत्रीय योजना-2041’ के मसौदे से “प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र” शब्द हटाकर केवल “प्राकृतिक क्षेत्र” शब्द का इस्तेमाल किया गया था।

पर्यावरणविदों ने कहा था कि इस बदलाव का अर्थ यह है कि एनसीआर क्षेत्रीय योजना में संरक्षण अब महत्वपूर्ण नहीं रह गया है, जिससे क्षेत्र की अरावली पहाड़ियों, वन क्षेत्रों और सभी जल निकायों पर खतरा पैदा हो सकता है।

हालांकि, पर्यावरणविदों का कहना है कि 16 जून को होने वाली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) योजना बोर्ड की बैठक की नवीनतम कार्यसूची में कहा गया है, “एनसीआर क्षेत्रीय योजना 2021 के ‘प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र’ की अवधारणा को नयी एनसीआर योजना 2041 में बरकरार रखा जाएगा।”

‘अरावली बचाओ नागरिक आंदोलन’ की सह-संस्थापक नीलम अहलूवालिया ने एक बयान में कहा कि शब्दावली में बदलाव का विरोध करने वाले लोगों के लिए यह “बड़ी राहत” है।

उन्होंने कहा कि नयी शब्दावली के विरोध के लिए धरना-प्रदर्शन किए गए थे और लोगों ने विभिन्न अधिकारियों को पत्र लिखे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘आपत्ति पत्रों में सुझाव दिया गया था कि 2021 की क्षेत्रीय योजना में इस्तेमाल एनसीजेड शब्दावली को नयी क्षेत्रीय योजना 2041 में बरकरार रखा जाए और उसकी जगह केवल ‘प्राकृतिक क्षेत्र’ शब्द का इस्तेमाल न किया जाए। मसौदा एनसीआर क्षेत्रीय योजना 2041 में ‘प्राकृतिक क्षेत्र’ के रूप में वर्गीकृत इलाकों के लिए एनसीजेड क्षेत्रों की तरह अनिवार्य संरक्षण जरूरी नहीं है, जबकि मौजूदा एनसीआर क्षेत्रीय योजना 2021 के तहत राज्य इन क्षेत्रों का संरक्षण करने के लिए बाध्य है और कुल प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र के केवल 0.5 प्रतिशत हिस्से में ही निर्माण की अनुमति है।”

जल और अरावली संरक्षण से जुड़े डॉ. राजेंद्र सिंह ने एक बयान में कहा कि 2022 की मसौदा योजना में ‘प्राकृतिक क्षेत्र’ का मतलब पर्वत, पहाड़ियां, नदियां, जल निकाय और वन जैसे प्राकृतिक चीजों से था, जिन्हें केंद्र या राज्य के कानूनों के तहत संरक्षण के लिए अधिसूचित किया गया हो और भूमि अभिलेखों में भी इसी रूप में दर्ज किया गया हो।

सिंह ने कहा, “यह बहुत कड़ा प्रतिबंध था, क्योंकि इससे एनसीआर के अधिकतर वन और अरावली क्षेत्र, यहां तक कि नदियां, बाढ़ क्षेत्र और जल निकाय भी बाहर हो जाते, क्योंकि इनमें से बहुत कम क्षेत्र प्रस्तावित दोनों मानदंडों को पूरा करते थे।”

एनसीआर क्षेत्रीय योजना 2021 में पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों के रूप में चिह्नित प्रमुख प्राकृतिक चीजों में राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में फैली अरावली पर्वतमाला का विस्तार, वन क्षेत्र, यमुना, गंगा, काली, हिंडन और साहिबी नदियां तथा उनकी सहायक नदियां एवं अभयारण्य शामिल हैं। इन्हें प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र (एनसीजेड) के रूप में चिह्नित किया गया है।

इसमें हरियाणा उप-क्षेत्र की बड़खल झील, सूरजकुंड और दमदमा तथा राजस्थान की सिलीसेढ़ जैसी प्रमुख झील और जल निकाय भी शामिल हैं।

भाषा राखी सुरेश

सुरेश


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