समावेशी और संवेदनशील समाज के निर्माण में दिव्यांगजनों की समान भागीदारी आवश्यक है: मुख्यमंत्री शर्मा

समावेशी और संवेदनशील समाज के निर्माण में दिव्यांगजनों की समान भागीदारी आवश्यक है: मुख्यमंत्री शर्मा

समावेशी और संवेदनशील समाज के निर्माण में दिव्यांगजनों की समान भागीदारी आवश्यक है: मुख्यमंत्री शर्मा
Modified Date: August 8, 2025 / 09:48 pm IST
Published Date: August 8, 2025 9:48 pm IST

जयपुर, आठ अगस्त (भाषा) राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि दिव्यांगजन समाज का अभिन्न अंग हैं और समावेशी एवं संवेदनशील सामाजिक व्यवस्था के निर्माण में उनकी समान भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य सरकार दिव्यांगजनों को केन्द्र में रखकर निरंतर कार्य कर रही है तथा उन्हें सशक्त बनाने के लिए कृत संकल्पित है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय तथा बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की परिकल्पना अंत्योदय को साकार करने में जुटी है।

शर्मा ने प्रदेशवासियों से एकात्म मानववाद तथा नागरिक कर्तव्यों को निभाते हुए प्रत्येक जरूरतमंद की मदद करने की अपील की।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को जामडोली के सामाजिक न्याय संकुल परिसर में आयोजित ‘विशेष योग्यजन बहन सम्मान दिवस समारोह’ को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने सभी बहनों को रक्षाबंधन की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह त्यौहार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है, जो आपसी स्नेह, विश्वास और संरक्षण की भावना को मजबूत करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कई योजनाएं एवं नवाचारों के माध्यम से महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा हाल ही में दिव्यांगजनों को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए ’समान अवसर नीति 2025’ लाई गई।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत प्रथम संतान के जन्म के समय दी जाने वाली राशि पांच हजार रुपये से बढ़ाकर छह हजार 500 रुपये की है। इस योजना में दिव्यांग गर्भवती महिला को 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार द्वारा विधवाओं, एकल नारियों तथा दिव्यांग व्यक्तियों को दी जा रही पेंशन को बढ़ाकर 1250 रुपये प्रति माह किया गया है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दिव्यांग बच्चियों को अपने समीप बिठाकर संवाद भी किया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजनों को खीर प्रसादी भी वितरित की।

भाषा कुंज संतोष

संतोष


लेखक के बारे में