समानता हकीकत में तब्दील होना चाहिए: प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत
समानता हकीकत में तब्दील होना चाहिए: प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत
(तस्वीरों के साथ)
बेंगलुरु, 21 मार्च (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को विधि पेशे में महिलाओं के लिए ‘औपचारिक समानता’ को वास्तविक, व्यावहारिक अनुभवों में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने इसी के साथ महिलाओं की निरंतर भागीदारी और उन्नति सुनिश्चित करने के लिए ढांचागत सुधारों एवं सतत संस्थागत समर्थन का आह्वान किया।
प्रधान न्यायाधीश ने बेंगलुरु के बाहरी इलाके में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 में ‘न्यायिक शासन की पुनर्कल्पना: लोकतांत्रिक न्याय के लिए संस्थानों का सुदृष्ढ़ीकरण’ विषय पर परिचर्चा के दौरान एक सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्षों को रेखांकित किया, जिसमें महिला वकीलों के सामने आने वाली चुनौतियों और प्रणालीगत समाधानों की आवश्यकता को दर्शाया गया है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि जब हम अपने संवैधानिक ढांचे के भीतर समानता की बात करते हैं, तो यह समानता केवल कागजी नहीं होनी चाहिए। इसलिए समानता को वास्तविकता में तब्दील करना होगा।’’ उन्होंने महिला वकीलों द्वारा तैयार किए गए सर्वेक्षण की सराहना करते हुए इसे ‘‘एक अत्यंत उल्लेखनीय और वैज्ञानिक सर्वेक्षण’’ तथा ‘‘आंखें खोलने वाला’’ बताया, जो चुनौतियों की पहचान और समाधान के लिए एक मार्गदर्शन करता है।
सीजेआई ने उत्साहजनक रुझानों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अब विधि विद्यालयों में 50 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी छात्राएं हैं और बार में नए प्रवेशकों में भी उनका एक अच्छा खासा अनुपात है। हालांकि, उन्होंने वकीलों के बीच में ही पेशा छोड़ने की दर पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा, ‘‘समस्या इसके बाद शुरू होती है। क्या हम जीवन में प्रगति के बाद के चरणों में, पेशेवर जीवन में प्रगति के दौरान, उस समानता को बनाए रख पा रहे हैं?’’
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘आइए उन मुद्दों, चुनौतियों, बाधाओं और अड़चनों की पहचान करें, जो अंततः महिलाओं को समानता से वंचित कर रहे हैं।’’
ठोस उपाय सुझाते हुए प्रधान न्यायाधीश ने सरकारी पैनल और कानूनी सहायता में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें 30 प्रतिशत से संतुष्ट नहीं होना चाहिए – कम से कम 50 प्रतिशत महिला वकीलों को सरकारी वकील के रूप में पैनल में शामिल किया जाना चाहिए।’’
सीजेआई ने कहा कि कानूनी सहायता समितियों में भी इसी तरह का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
भाषा
राजकुमार धीरज
धीरज

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