प्रत्येक युवा की भविष्य को गढ़ने में भूमिका है : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
प्रत्येक युवा की भविष्य को गढ़ने में भूमिका है : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
(तस्वीरों के साथ)
चेन्नई, दो जनवरी (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि अगले दो दशकों के भीतर विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी नागरिकों, ‘‘विशेष रूप से युवाओं’’ की भागीदारी आवश्यक होगी।
उपराष्ट्रपति ने चेन्नई स्थित डॉ. एमजीआर शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थान के 34वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भविष्य को आकार देने में प्रत्येक युवा की भूमिका होती है। आपको राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देना चाहिए।’’
राधाकृष्णन ने छात्रों से आजीवन सीखने वाले बनने और राष्ट्र की प्रगति में सार्थक योगदान देने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी पर आधारित शिक्षा भारत के विकास के लिए आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘सफलता के शॉर्टकट क्षण भर के लिए भव्य और सफल प्रतीत हो सकते हैं, लेकिन वे भ्रामक होते हैं। ऐसे शॉर्टकट अंततः पतन की ओर ले जाते हैं… इसलिए, आपके द्वारा किया गया प्रत्येक प्रयास सद्गुण (धर्म) और अनुशासन पर आधारित होना चाहिए।’’
उन्होंने स्नातकों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा, ‘‘दीक्षांत समारोह जीवन के एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है, जो अधिक जिम्मेदारियों और अवसरों को लेकर आता है।’’ राधाकृष्णन ने विश्वास व्यक्त किया कि छात्र ‘‘पेशेवर दक्षता, करुणा और प्रतिबद्धता’’ के साथ समाज की सेवा करेंगे।
उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु की शिक्षा और समुद्री व्यापार के ऐतिहासिक केंद्र के रूप में विरासत को याद करते हुए कहा कि राज्य लंबे समय से दुनिया के साथ भारत के बौद्धिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रवेश द्वार रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘इन्हीं तटों से, व्यापारी कभी भारत के विचारों, नैतिकता और संस्कृति को समुद्र पार ले जाते थे। यह हमारे राष्ट्र की आत्मविश्वासपूर्ण सभ्यतागत सहभागिता और सीखने और आदान-प्रदान के प्रति खुलेपन को दर्शाता है।’’
राधाकृष्णन ने कृत्रिम मेधा (एआई) और उभरती प्रौद्योगिकियों की वजह से तेजी से हो रहे बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा, ‘‘यह प्रगति हर क्षेत्र को नया आकार दे रही है।’’
उपराष्ट्रपति ने निरंतर सीखने और अनुकूलनशीलता की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने सलाह दी, ‘‘आपको निरंतर अपने कौशल को निखारते रहना चाहिए, जीवन भर सीखने की मानसिकता अपनानी चाहिए और नयी तकनीकों से जुड़ना चाहिए – यहां तक कि उन तकनीकों से भी जो आपके चुने हुए विषय से परे हैं।’’
राधाकृष्णन ने इस बात पर भी जोर दिया कि अकादमिक उत्कृष्टता मजबूत नैतिक आधारों पर टिकी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘सच्ची शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने के बारे में नहीं है, बल्कि ईमानदारी, सहानुभूति और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के बारे में भी है।’’
छात्रों को परिसर से बाहर के जीवन के बारे में सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सफलता और असफलता मानवीय अनुभव का अभिन्न अंग हैं।
उन्होंने स्नातकों से कहा, ‘‘संतुलन, दृढ़ता और मानसिक शक्ति के साथ दोनों का सामना करें। शॉर्टकट अपनाने और दूसरों से तुलना करने से बचें। स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें, निरंतर प्रगति करें और अपनी अनूठी क्षमताओं पर विश्वास रखें।’’
तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री एम.ए. सुब्रमणियन ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कि तमिलनाडु में 76 चिकित्सा महाविद्यालय हैं, जो किसी भी राज्य में सबसे अधिक हैं।
भाषा धीरज नेत्रपाल
नेत्रपाल

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