म्यांमा में अफीम की अधिक खेती से पूर्वोत्तर राज्यों में मादक पदार्थ की तस्करी का खतरा बढ़ा
म्यांमा में अफीम की अधिक खेती से पूर्वोत्तर राज्यों में मादक पदार्थ की तस्करी का खतरा बढ़ा
(नीलाभ श्रीवास्तव)
नयी दिल्ली, 27 जून (भाषा) पड़ोसी देश म्यांमा में गैर-कानूनी अफीम की खेती और उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी के कारण, वहां से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और देश के भीतरी इलाकों तक मादक पदार्थ की तस्करी का खतरा बहुत बढ़ गया है। एक हालिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
मादक पदार्थ के खिलाफ काम करने वाली केंद्रीय एजेंसी ‘मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो’ की वर्ष 2025 से संबंधित रिपोर्ट में कहा गया है कि म्यांमा में यह घटनाक्रम एक ‘तेजी से बढ़ता’ खतरा है, क्योंकि अफगानिस्तान में अफीम के उत्पादन में ‘भारी गिरावट’ के बाद वैश्विक कमी को पूरा करने के लिहाज से यह ‘सबसे अहम आपूर्ति क्षेत्र’ बन गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1,643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमा अंतरराष्ट्रीय सीमा ‘स्वर्णिम त्रिभुज’ क्षेत्र से मेथामफेटामाइन और हेरोइन के लिए एक ‘प्रमुख’ प्रवेश बिंदु के रूप में का काम करती है।
इस खतरे को सीमा के मुश्किल इलाकों और ‘फ्री मूवमेंट रिजीम’ (एफएमआर) ने और बढ़ा दिया है, खासकर मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में।
भौगोलिक रूप से भारत एक तरफ उत्तर-पश्चिम में ‘गोल्डन क्रिसेंट’ (पाकिस्तान-अफगानिस्तान-ईरान) और दूसरी तरफ उत्तर-पूर्व में ‘स्वर्णिम त्रिभुज’ (थाईलैंड-म्यांमा-लाओस) के बीच स्थित है। ये दुनिया में मादक पदार्थ के उत्पादन से जुड़े दो सबसे बड़े क्षेत्र हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘वर्ष 2022 में तालिबान द्वारा मादक पदार्थ पर रोक लगाई गई, जिससे अफगानिस्तान में अफीम का उत्पादन अपने सवोच्च स्तर से 93 प्रतिशत तक कम हो गया, (लेकिन) मादक पदार्थ और अपराध संबंधी संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (यूएनओडीसी) के मुताबिक, तालिबान की इस रोक के बावजूद 2026 तक की मांग को पूरा करने के लिए अब भी पर्याप्त भंडार मौजूद है।’’
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्पादन में इस कमी को भारत के लिए कम होते खतरे के तौर पर देखना समझदारी नहीं होगी।
दूसरी ओर रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2020-24 के बीच म्यांमा में अफीम का अवैध उत्पादन 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है और इसकी खेती का रकबा 45,200 हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
इस वजह से भारत-म्यांमा सीमा अफगानिस्तान में उत्पादन ठप होने से उत्पन्न वैश्विक कमी को पूरा करने के लिए ‘सबसे अहम वैकल्पिक आपूर्ति क्षेत्र’ बन गई है।
भाषा संतोष सुरेश
सुरेश

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