विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक से संबंधित संयुक्त समिति का कार्यकाल बढ़ाया गया

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक से संबंधित संयुक्त समिति का कार्यकाल बढ़ाया गया

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक से संबंधित संयुक्त समिति का कार्यकाल बढ़ाया गया
Modified Date: August 6, 2026 / 04:10 pm IST
Published Date: August 6, 2026 4:10 pm IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र स्व-शासी संस्थान बनाने के प्रावधान वाले ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ से संबंधित संसद की संयुक्त समिति का कार्यकाल बृहस्पतिवार को शीतकालीन सत्र तक बढ़ा दिया गया।

समिति की अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी की सांसद डी. पुरंदेश्वरी ने लोकसभा में यह प्रस्ताव रखते हुए कहा, ‘‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 से संबंधित संयुक्त समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के समय को शीतकालीन सत्र 2026 के अंतिम सप्ताह तक बढ़ाया जाए।’’

सदन ने ध्वनिमत से इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

पिछले साल शीतकालीन सत्र के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह विधेयक लोकसभा में पेश किया था। सरकार ने इसे संसद की एक संयुक्त समिति को भेजने पर सहमति जताई थी।

विधेयक का उद्देश्य विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को सशक्त बनाना है ताकि वे शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें। विधेयक के अधिनियम का रूप लेने पर, इसके प्रावधान केंद्र या राज्य के अधिनियम द्वारा स्थापित या संचालित विश्वविद्यालयों पर भी लागू होंगे।

विधेयक पेश किए जाते समय कई विपक्षी सदस्यों ने इसके हिंदी नाम को लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि यह विधेयक हिंदी थोपने की कोशिश है।

गत 16 जुलाई को पुरंदेश्वरी की अध्यक्षता वाली संसद की संयुक्त समिति ने कहा था कि विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 से व्यापक नियामक शक्तियां एक ही केंद्रीय नियामक के पास केंद्रित हो सकती हैं जिससे उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका है।

संयुक्त समिति की मसौदा रिपोर्ट के अनुसार, विधेयक में प्रस्तावित अलग-अलग स्तर के दंड की व्यवस्था को मनमाने तरीके से लागू नहीं किया जा सकता।

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) विधेयक, 2025 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को समाप्त कर एक एकीकृत नियामक आयोग बनाने का प्रस्ताव किया गया है ताकि देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए जा सकें।

भाषा वैभव सुभाष

सुभाष


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