साल भर की मेहनत में किसान हफ़्तेभर भी खाना नहीं खा सकता?

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साल भर की मेहनत में किसान हफ़्तेभर भी खाना नहीं खा सकता?

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  • Publish Date - March 23, 2018 / 06:51 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:28 PM IST

महाराष्ट्र। हमारे देश के कर्मठ किसानों की बदौलत ही दुनियाभर में हमारी पहचान कृषि प्रधान देश की है। देश में किसान को अन्नदाता कहा जाता है. लेकिन क्या कभी आपने या हमने अपने अन्नदाता के भविष्य को लेकर सोचा है? किसान साल भर खेत पर मेहनत करता है. और उस दौरान वो कई प्रकार की समस्याओं से जूझता है. कठोर परिश्रम के बाद हमारे लिए अन्न उगाने वाला अन्नदाता कई बार भूखा सोता है. अपने लिए नई सुबह की कल्पना करने वाला किसान हर बार अपनी पुरानी भूख को मिटाने के लिए लड़ता रहता है. लेकिन हालात कल वैसे ही थे और आज वही हैं, और हो सकता है आने वाले समय में भी वैसे ही रहें। 

 

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अब आप सोच रहे होंगे कि देश में किसान की समस्या तो आम है तो हम आपको क्या नया बता रहे हैं. तो चलिए हम आपको किसान के सालभर की मेहनत का गणित समझाते हैं. किसान को साल भर की मेहनत का इतना फल नहीं मिलता है कि वो एक हफ़्ते भी ठीक से खाना खा सके. 

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दरसअल, महाराष्ट्र के एक किसान के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, दिन-रात मेहनत करके 400 किलो फूल गोभी का उत्पादन करने पर जब वो मार्केट में उसे बेचने गया तो उसे मात्र 442 रुपये देने की बात की गई.  यानी 1 किलो फूल गोभी 1 रुपये और 10 पैसे में. जबकि मार्केट में जब हम लोग गोभी खरीदने जाते हैं तो 10 रुपये किलो से कम में तो कभी भी नहीं मिलती है. किसान ने इससे परेशान आकर खेत में उगाई गई गोभी की पूरी फसल को ख़ुद ही नष्ट कर दिया, फसल को बर्बाद करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हो रहा है। अपनी खून पसीने की मेहनत को अपने ही हाथों से नष्ट करना भला किसे अच्छा लगता है लेकिन हालात इस तरह की कदम उठाने पर मजबूर कर देते हैं। अगर किसान अपनी साल भर की मेहनत से एक हफ्ते के खाने का भी प्रबंधन नहीं कर सकता है, तो ये हमारे लिए शर्म की बात है।

हमें हर सब्जी, फल सस्ते दामों में लेनी होती हैं, लेकिन इन सब के बीच हम भूल जाते हैं किसान की मेहनत. अपने फायदे के लिए किसान की मेहनत को नजरअंदाज करने वाले हर आम जन को ये याद रखना चाहिए कि अन्नदाता है तो हम हैं।

 

 

वेब डेस्क, IBC24