प्लेस्कूल में ‘प्रताड़ित’ किए गए तीन वर्षीय बच्चे के पिता ने अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया
प्लेस्कूल में 'प्रताड़ित' किए गए तीन वर्षीय बच्चे के पिता ने अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया
नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मौजपुर स्थित एक प्लेस्कूल में तीन साल के बच्चे के साथ कई घंटे तक शारीरिक उत्पीड़न का मामला सामने आया है। पीड़ित बच्चे के पिता ने आरोप लगाया है कि सीसीटीवी फुटेज में उनके बेटे को करीब तीन घंटे तक कुर्सी से बंधा हुआ, बार-बार पीटते और लात मारते हुए देखा गया है। एक अन्य फुटेज में एक व्यक्ति बच्चे के गुप्तांगों पर हाथ रखते हुए भी नजर आ रहा है।
परिजनों का दावा है कि इस घटना के बाद बच्चा गंभीर मानसिक और शारीरिक आघात से जूझ रहा है। उसे शौच करते हुए भी दिक्कत हो रही है और वह इस कदर डरा हुआ है कि चिकित्सीय जांच तक कराने से घबरा रहा है।
विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली सरकार ने सोमवार को मौजपुर स्थित इस प्लेस्कूल को सील कर दिया।
अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान स्कूल में आपातकालीन निकास द्वार बंद मिलने और अग्निशामक यंत्रों के काम न करने जैसी सुरक्षा एवं भवन संबंधी मानकों की कई गंभीर अनदेखी पाई गई।
शिकायत में बच्चे के पिता ने आरोप लगाया है कि सीसीटीवी फुटेज में बच्चा एप्रन की मदद से कुर्सी से बंधा हुआ दिख रहा है। वह बार-बार खुद को छोड़े जाने की मिन्नतें करता रहा, लेकिन उसे कमरे में अकेला छोड़ दिया गया। फुटेज में यह भी दिखा कि जब बच्चा चुपचाप बैठा था, तब भी उसके साथ मारपीट की गई, उसके कान पकड़े गए और लात मारी गई।
पिता ने यह भी आरोप लगाया कि फुटेज में एक व्यक्ति बच्चे के गुप्तांगों को छूता दिख रहा है।
बच्चे के दादा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उनका पोता पिछले करीब डेढ़ साल से इस प्लेस्कूल में जा रहा था। जब उसने अजीब व्यवहार करना और बार-बार अपने कानों को छूना शुरू किया, तब परिवार को अनहोनी की आशंका हुई।
उन्होंने बताया, “एक दिन वह काफी डरा हुआ लगा और बार-बार कान छू रहा था। डॉक्टर से जांच कराने पर पता चला कि उसके दोनों कानों के पर्दे सूजे हुए हैं और उन्हें शक था कि बच्चे को पीटा गया है। इसके बाद हम स्कूल पहुंचे और पूरी बात पूछी।”
परिजनों के मुताबिक, 18 अगस्त को जब वह स्कूल से घर लौटा तो उसे उल्टी और चक्कर आने की शिकायत थी।
माता-पिता उसे बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले गए, जिन्होंने आंख के पास सूजन देखकर ‘ईएनटी’ (कान, नाक और गला) विशेषज्ञ से परामर्श की सलाह दी। ईएनटी डॉक्टर ने भी कानों के पर्दे में सूजन की पुष्टि करते हुए बच्चे से मारपीट की आशंका जताई।
पिता का आरोप है कि बच्चा सीटी स्कैन के दौरान भी बेहद डरा हुआ था। उसे सुलाने के लिए दवा दी गई थी, लेकिन सीटी स्कैन मशीन की आवाज सुनते ही वह घबराकर उठ गया।
इसके बाद परिजनों ने स्कूल प्रशासन से संपर्क कर 16, 17 और 18 अगस्त की सीसीटीवी फुटेज मांगी।
दादा का आरोप है कि स्कूल ने पहले फुटेज देने से मना किया और बाद में इसके लिए 1,500 रुपये मांगे। रकम चुकाने के बाद जब परिजनों ने फुटेज देखी, तो उनके होश उड़ गए।
पिता ने स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, “मैं इसके लिए प्रबंधन, मालिक और प्रधानाचार्य सभी को जिम्मेदार मानता हूं। अगर वे रोजाना सीसीटीवी फुटेज की निगरानी करते हैं, तो क्या बच्चों की सुरक्षा देखना उनका फर्ज नहीं है? मैं इन सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहता हूं।”
गत 27 अगस्त को पिता ने स्कूल के बाहर से आपातकालीन नंबर 112 पर पुलिस को कॉल किया और पुलिस टीम के साथ परिसर में दाखिल हुए। इसके बाद बच्चे का मेडिकल परीक्षण कराया गया।
प्राथमिकी के अनुसार, मेडिकल जांच में बच्चे की बाईं जांघ पर सूजन और बाईं आंख के पास खरोंच के निशान मिले हैं। शरीर पर अन्य कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई है।
पुलिस ने 28 अगस्त को जाफराबाद थाने में स्कूल के निदेशक, प्रधानाचार्य, शिक्षिका और केयरटेकर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, किशोर न्याय अधिनियम और पॉक्सो कानून की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में एक केयरटेकर को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक महिला को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजा गया है।
भाषा नोमान नोमान माधव
माधव

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