शिमला के पूर्व एसएसपी को सरकारी बंगला खाली नहीं करने पर भरना पड़ेगा 1.8 लाख रुपये का जुर्माना

शिमला के पूर्व एसएसपी को सरकारी बंगला खाली नहीं करने पर भरना पड़ेगा 1.8 लाख रुपये का जुर्माना

शिमला के पूर्व एसएसपी को सरकारी बंगला खाली नहीं करने पर भरना पड़ेगा 1.8 लाख रुपये का जुर्माना
Modified Date: June 20, 2026 / 05:50 pm IST
Published Date: June 20, 2026 5:50 pm IST

शिमला, 20 जून (भाषा) शिमला के पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से 1.8 लाख रुपये से अधिक का ‘दंडात्मक किराया’ (पेनल रेंट) वूसला जाएगा। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि उपमहानिरीक्षक के पद पर पदोन्नत होने के बावजूद महीनों तक सरकारी आवास नहीं खाली करने के कारण उनसे यह वसूली की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि संजीव कुमार गांधी को पदोन्नत करके डीआईजी (यातायात, पर्यटन एवं रेलवे) बनाया गया और उनसे मई में ही आवास खाली करने के लिए कहा गया था।

उन्होंने बताया कि इस रकम में मार्च और अप्रैल के लिए 1.28 लाख रुपये से अधिक की राशि और मई के लिए लगभग 51,000 रुपये शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि गांधी ने कुछ मीडियाकर्मियों से कहा कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है और उन्हें नहीं पता कि यह बात मीडिया में कैसे फैली।

गांधी ने दावा किया कि उन्होंने अपना पिछला आवास इसलिए खाली नहीं किया क्योंकि उन्हें कोई नया आवास आवंटित नहीं किया गया है।

हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक तिवारी ने अधिकारी को नोटिस भेजा है क्योंकि उन्होंने शिमला के एसएसपी का पद छोड़ने के बाद भी अपना सरकारी आवास खाली नहीं किया है। नोटिस में कहा गया है कि उनका शिमला स्थित आवास में रहना अनधिकृत (बिना अनुमति के) माना जाएगा।

डीजीपी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आवंटन (सामान्य पूल) नियम, 1994 के नियम 10(2) के अनुसार, तबादला होने पर किसी खास आवास में रहने वाले अधिकारी को पदभार सौंपने के एक महीने के भीतर आवास खाली करना होता है।

उन्होंने कहा कि नियम 18ए के तहत 18 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति महीने का दंडात्मक किराया लिया जाता है। डीजीपी ने बताया कि अधिकारी से मई में ही आवास खाली करने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने इसे खाली नहीं किया।

डीजीपी ने बताया कि जब तक डीआईजी सरकारी आवास खाली नहीं करते, तब तक यह रकम उनके वेतन से प्रति माह के आधार पर काटी जाएगी।

भाषा संतोष माधव

माधव


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