जीआईएस को अरुणाचल में शासन व्यवस्था का प्रमुख आधार बनाया जाए: राज्यपाल
जीआईएस को अरुणाचल में शासन व्यवस्था का प्रमुख आधार बनाया जाए: राज्यपाल
ईटानगर, छह अगस्त (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल के. टी. परनाइक ने बृहस्पतिवार को कहा कि बेहतर निर्णय लेने के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) प्रौद्योगिकी को राज्य में शासन व्यवस्था का एक प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए।
परनाइक ने ‘एसरी इंडिया’ द्वारा आयोजित ‘जियो विजन ईटानगर’ संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के लिए प्रभावी प्रशासन के वास्ते प्रौद्योगिकी आधारित समाधान की जरूरत है।
जीआईएस आधारित शासन की ओर बढ़ने पर जोर देते हुए, परनाइक ने राज्य सरकार के सभी विभागों से ‘राज्य भू-स्थानिक शासन प्लेटफॉर्म’ तैयार कर एक साझा भू-स्थानिक व्यवस्था अपनाने का आग्रह किया।
राजभवन द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्यपाल ने कहा कि इस प्रस्तावित व्यवस्था में राजस्व, योजना, ग्रामीण विकास, लोक निर्माण, वन, कृषि, आपदा प्रबंधन और बिजली जैसे विभागों के आंकड़ों को एकीकृत किया जाना चाहिए, ताकि काम की पुनरावृत्ति को रोका जा सके और साक्ष्य आधारित नीति बनाई जा सके।
उन्होंने विवादों में कमी लाने और निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने के वास्ते जीआईएस आधारित भूमि सर्वेक्षण में तेजी लाने, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और विशिष्ट भूखंड पहचान संख्या (यूएलपीआईएन) प्रणाली को लागू करने की भी वकालत की।
उन्होंने विशेष रूप से ‘वाइब्रेंट विलेज’ कार्यक्रम के तहत रणनीतिक बुनियादी ढांचे, सड़कों, स्वास्थ्य और शैक्षणिक सुविधाओं की निगरानी के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोन आधारित मानचित्रण और ‘रियल टाइम’ निगरानी का सुझाव दिया।
राज्यपाल ने कहा कि जीआईएस आधारित उपयुक्तता विश्लेषण से कीवी, सेब, अखरोट और बड़ी इलायची जैसी उच्च मूल्य वाली बागवानी को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ जैसे सामाजिक अभियानों को लक्षित तरीके से लागू करने में भी मददगार हो सकती है।
भाषा सुभाष सुरेश
सुरेश

Facebook


