सरकार ने नागरिकों से घबराहट में ईंधन की खरीदारी न करने का आग्रह किया
सरकार ने नागरिकों से घबराहट में ईंधन की खरीदारी न करने का आग्रह किया
नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को जनता से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की घबराहट में खरीदारी (पैनिक बाइंग) से बचने की अपील की और आश्वासन दिया कि ईंधन की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रही है।
पश्चिम एशिया में हालात की निगरानी के लिए गठित अनौपचारिक मंत्रिस्तरीय समूह (आईजीओएम) की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए, सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बदलते परिदृश्य में राष्ट्र की तैयारियों को और दुरुस्त करने के लिए निरंतर प्रयास करें।
आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उर्वरक और कृषि से जुड़े अन्य आवश्यक संसाधन किसानों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते रहें, ताकि देश में खाद्य पदार्थों की कीमतें स्थिर बनी रहें।
इस बैठक में रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, रेल एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव, ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल और बंदरगाह एवं जहाजरानी मंत्री सर्वानंद सोनोवाल सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज देश में आपूर्ति की स्थिति सामान्य है। नागरिकों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की घबराहट में खरीदारी से बचना चाहिए, क्योंकि सरकार सभी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।’’
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘उत्कृष्ट कार्य’ किया है।
आईजीओएम को यह जानकारी दी गई कि देश भर में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर्याप्त है।
रक्षा मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘वर्तमान व्यवधान के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हुई पूरी बढ़ोतरी को खुदरा कीमतों में नहीं डाला है और लगभग 550 करोड़ रुपये प्रतिदिन का नुकसान स्वयं वहन किया है।’’
इसमें कहा गया है कि यह सुविधा केवल खुदरा खपत के लिए है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘आईजीओएम को सूचित किया गया कि देश में उर्वरकों का कुल भंडार संतोषजनक है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा खरीफ 2026 के लिए उर्वरक की आवश्यकता 390.54 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है, जबकि आज की स्थिति में यह लगभग 200.47 लाख मीट्रिक टन है।’’
भाषा शोभना सुरेश
सुरेश

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