उभयलिंगी विधेयक लाकर समुदाय के साथ अन्याय किया है सरकार ने : द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा

उभयलिंगी विधेयक लाकर समुदाय के साथ अन्याय किया है सरकार ने : द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा

उभयलिंगी विधेयक लाकर समुदाय के साथ अन्याय किया है सरकार ने : द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा
Modified Date: March 25, 2026 / 03:51 pm IST
Published Date: March 25, 2026 3:51 pm IST

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को द्रमुक नेता तिरुचि शिवा ने उभयलिंगी लोगों के बारे में सरकार द्वारा लाये गये एक विधेयक को इस समुदाय के साथ अन्याय करार देते हुए इसे वापस लेने या प्रवर समिति के पास भेजने का सुझाव दिया।

उच्च सदन में उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए शिवा ने कहा कि वह इस विधेयक पर चर्चा में भाग लेने के लिए विशेष तौर पर आज सुबह चेन्नई से आये हैं। उन्होंने कहा कि वह बेहद दुख एवं पीड़ा के साथ कह रहे हैं कि उभयलिंगियों के साथ एक बार फिर अन्याय होने जा रहा है।

उन्होंने सरकार को आगाह किया कि वह भले ही अपने बहुमत के बल पर इस विधेयक को पारित करवा ले किंतु यह उच्चतम न्यायालय में खारिज हो जाएगा क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि यह उभयलिंगी वर्ग के लोगों का सम्मान से जीवन जीने के अधिकार, निजता आदि के अधिकारों का हनन करता है।

शिवा ने कहा कि विधायिका का काम होता है कि वह लोगों के कष्टों एवं समस्याओं को दूर करने के लिए कानून बनाये लेकिन इस मामले में ऐसा कानून बनाया जा रहा है जो लोगों के विरुद्ध हो।

उन्होंने उभयलिंगी वर्ग की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि समाज में पहले ही उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है किंतु अब सरकार इस प्रस्तावित कानून के माध्यम से उन्हें कई मायने में आपराधिक दायरे में ला रही है।

द्रमुक सदस्य ने कहा कि सरकार ने 2014 में उभयलिंगी समुदाय के मुद्दों पर विचार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी जिसने अपनी रिपोर्ट दी थी। उसी समय नाल्सा ने उच्चतम न्यायालय में सरकार पर एक मामला दायर किया था तथा इसी समय द्रमुक सदस्य ने उभयलिंगी समूह के बारे में उच्च सदन में एक निजी विधेयक पेश किया था।

उन्होंने कहा कि द्रमुक सरकार के शासनकाल में तमिलनाडु में देश का पहला उभयलिंगी कल्याण बोर्ड बनाया गया था।

शिवा ने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता समवर्ती सूची का विषय है तथा सरकार को बताना चाहिए कि मौजूदा विधेयक लाने से पहले उसने क्या किसी राज्य के साथ या इस समुदाय के लोगों के साथ विचार विमर्श किया था?

उन्होंने कहा कि 1970 के 45 साल बाद राज्यसभा में एक निजी विधेयक पारित हुआ जो उनके द्वारा उभयलिंगी समूह के कल्याण के लिए लाया गया विधेयक था। उन्होंने कहा कि इस बारे में यूपीएससी की एक परीक्षा में प्रश्न भी पूछा गया था।

द्रमुक सदस्य ने कहा कि इस विधेयक पर लोकसभा में सात बैठकों में चर्चा हुई तथा सरकार ने उनसे भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार अभी जो विधेयक लेकर आयी है उसमें उनके द्वारा लिये गये विधेयक के प्रावधानों को बहुत हल्का कर दिया गया है।

उन्होंने दावा किया कि सरकार उच्चतम न्यायालय के इस बारे में दिये गये आदेशों के प्रभावों को हल्का करने के लिए यह विधेयक लायी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इससे संबंधित 2019 के अधिनियम में उभयलिंगी समुदाय को आत्म निर्धारण सहित जो अधिकार दिये हैं, उन्हें वापस लिया जा रहा है।

उन्होंने सरकार से इसे वापस लेने या इसे प्रवर समिति के पास भेजने का अधिकार दिया। उन्होंने कहा कि इस समुदाय के लोगों और नागरिक समाज से बात करके उनके सुझावों के आधार पर वह नये विधेयक को लेकर वापस आये और उनकी पार्टी उसका समर्थन करेगी।

भाषा

माधव मनीषा

मनीषा


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