छात्र आंदोलन के बीच मिजोरम लोक सेवा आयोग में सुधार के लिए समिति गठित करेगी सरकार
छात्र आंदोलन के बीच मिजोरम लोक सेवा आयोग में सुधार के लिए समिति गठित करेगी सरकार
आइजोल, 12 अगस्त (भाषा) राज्य के एक प्रभावशाली छात्र संगठन के विरोध-प्रदर्शन के बाद मिजोरम सरकार ने मिजोरम लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) को मजबूत करने और इसकी कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए एक ‘सुधार समिति’ गठित करने का फैसला किया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
छात्र संगठन ‘मीज़ो ज़िरलाई पॉल’ (एमजेडपी) के सदस्य आयोग में ढांचागत व भर्ती संबंधी बदलावों और अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की मांग को लेकर सोमवार से एमपीएससी कार्यालय की घेराबंदी कर रहे हैं।
अधिकारी ने बताया कि आइजोल में बुधवार को एमजेडपी के नेताओं, प्रभावित छात्रों के प्रतिनिधियों और एमपीएससी अधिकारियों की एक बैठक में इस सुधार समिति के गठन की घोषणा की गई। बैठक में छात्रों की शिकायतों और आयोग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के सचिव उदित प्रकाश राय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने ‘एमपीएससी सुधार समिति’ गठित करने का निर्णय लिया है और इस संबंध में मामला मुख्यमंत्री को भेज दिया गया है।
एमजेडपी के सदस्य सोमवार से आयोग दफ्तर के मुख्य द्वार पर डटे हुए हैं, जिससे कर्मचारी भीतर प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। इससे पहले संगठन ने छह और सात अगस्त को भी आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था।
इस आंदोलन के कारण एमपीएससी को लिखित परीक्षाओं और साक्षात्कार सहित कई जारी भर्ती प्रक्रियाओं को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करना पड़ा है।
एमजेडपी का आरोप है कि हाल की भर्तियों में प्रशासनिक कमियों के कारण अभ्यर्थियों का विश्वास टूटा है।
संगठन ने ‘एकमुश्त पंजीकरण’ (वन टाइम रजिस्ट्रेशन या ओटीआर) प्रणाली को खत्म कर पदों की आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग आवेदन पत्र जारी करने की मांग की है।
संगठन ने उन अभ्यर्थियों को आवश्यक दस्तावेज सीधे (ऑफलाइन) जमा करने का एक अंतिम अवसर देने की भी मांग की, जिनके आवेदन ओटीआर में दस्तावेज अधूरे रहने के कारण खारिज कर दिए गए थे – विशेष रूप से ऐसे अभ्यर्थियों को जो लिखित परीक्षा पास कर चुके थे, लेकिन बाद में दस्तावेज सत्यापन के दौरान अयोग्य घोषित कर दिए गए।’
हालांकि, एमपीएससी ने ओटीआर प्रणाली को समाप्त करने जैसी मांगों को खारिज करते हुए कहा कि इससे नयी जटिलताएं पैदा होंगी और एक समान भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होगी। आयोग के अनुसार, इस व्यवस्था को पारदर्शी व सुगम भर्ती के उद्देश्य से लागू किया गया था।
आयोग ने यह भी कहा कि जिन अभ्यर्थियों के आवेदन खारिज हुए हैं, उन्हें अलग से अवसर देना उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने समय पर सही आवेदन किया था। इसके अलावा, कुछ अभ्यर्थियों द्वारा गुवाहाटी उच्च न्यायालय की आइजोल पीठ में याचिका दायर करने के कारण अदालत में मामला लंबित रहते प्रक्रिया बदलना उचित नहीं होगा।
आयोग ने विरोध-प्रदर्शन पर चिंता जताते हुए कहा कि इस रुकावट से परीक्षाओं और साक्षात्कार में शामिल होने वाले अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं तथा सरकारी अधिकारियों की पदोन्नति में भी देरी हो सकती है।
वहीं, एमजेडपी ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार सुधार समिति के गठन का औपचारिक आदेश जारी नहीं कर देती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
भाषा सुमित नरेश
नरेश

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