गुजरात: धोलेरा में हरित आवरण बढ़ाने के लिए ‘ड्रम प्लांटेशन’ तकनीक रही सफल

गुजरात: धोलेरा में हरित आवरण बढ़ाने के लिए ‘ड्रम प्लांटेशन’ तकनीक रही सफल

गुजरात: धोलेरा में हरित आवरण बढ़ाने के लिए ‘ड्रम प्लांटेशन’ तकनीक रही सफल
Modified Date: June 4, 2026 / 08:35 pm IST
Published Date: June 4, 2026 8:35 pm IST

अहमदाबाद, चार जून (भाषा) सेमीकंडक्टर के उभरते केंद्र के रूप में विकसित हो रहे गुजरात के धोलेरा के अर्द्ध-शुष्क इलाके को हरित क्षेत्र में बदलने के लिए ‘ड्रम प्लांटेशन’ तकनीक का उपयोग किया गया। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि इस तकनीक के तहत पौधों को जमीन से ऊपर ड्रम में लगाया जाता है। इन ड्रम में रेत, पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी, वर्मी-कम्पोस्ट, फसल अवशेष और कोकोपीट की परतें भरी जाती हैं। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के उपयोग से क्षेत्र का ब्लॉक नंबर-29 घने हरित विस्तार वाले इलाके की तरह दिखाई देने लगा है।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘धोलेरा में तेज सौर विकिरण, मिट्टी में अधिक लवणता और बंजर भूमि जैसी चुनौतियां हैं। अगस्त 2025 में 15 प्रजातियों के 3,200 से अधिक पौधे लगाए गए थे। पौधों की जड़ों को अत्यधिक लवणता से बचाने के लिए प्लास्टिक के ड्रम का इस्तेमाल किया गया। एक वर्ष से भी कम समय में इनमें से कई पौधे 12 फुट तक के हो चुके हैं।’’

अहमदाबाद सामाजिक वानिकी प्रभाग की उप वन संरक्षक डॉ. मीनल जानी ने बताया कि इस परियोजना के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां थीं- मिट्टी की अत्यधिक विद्युत चालकता, कार्बन की कम मात्रा और अत्यधिक लवणता। इसके अलावा, क्षेत्र में छह महीने तक जलभराव रहने के कारण पौधों का विकास लगभग असंभव हो जाता था।

उन्होंने कहा, ‘‘इन चुनौतियों से निपटने के लिए ड्रम प्लांटेशन तकनीक अपनाई गई। हमने ड्रम के दोनों ओर हवा के प्रवाह के लिए छेद बनाए और उन्हें लगभग एक फुट तक जमीन में गाड़ा। सभी पौधों के लिए मीठे पानी की व्यवस्था और टपक सिंचाई प्रणाली भी स्थापित की गई।’’

जानी ने बताया कि लगभग सभी पौधे जीवित हैं और उनमें से कुछ पर फल भी आने लगे हैं। हरित आवरण के कारण परागण करने वाले कीट और विभिन्न पक्षी भी इस क्षेत्र में आने लगे हैं।

भाषा आशीष माधव

माधव


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