अगर समय पर चिकित्सा सहायता मिलती तो बीएमडब्ल्यू दुर्घटना में पीड़ित की जान नहीं जाती: आरोप पत्र

अगर समय पर चिकित्सा सहायता मिलती तो बीएमडब्ल्यू दुर्घटना में पीड़ित की जान नहीं जाती: आरोप पत्र

अगर समय पर चिकित्सा सहायता मिलती तो बीएमडब्ल्यू दुर्घटना में पीड़ित की जान नहीं जाती: आरोप पत्र
Modified Date: January 1, 2026 / 03:47 pm IST
Published Date: January 1, 2026 3:47 pm IST

नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) पिछले साल सितंबर में धौला कुआं के पास हुए बीएमडब्ल्यू दुर्घटना मामले में अपने आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि तेज रफ्तार बीएमडब्ल्यू कार से कुचले गए वित्त मंत्रालय के 52 वर्षीय अधिकारी नवजोत सिंह दुर्घटना के बाद कम से कम 15 मिनट तक जीवित थे और अगर उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता मिली होती तो उनकी जान बचाई जा सकती थी।

अंतिम रिपोर्ट पिछले सप्ताह मजिस्ट्रेटी अदालत में दाखिल की गई।

इस दुर्घटना में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में उप सचिव नवजोत सिंह की 14 सितंबर को मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी सहित तीन अन्य लोग घायल हो गए थे। यह हादसा उस समय हुआ जब कथित तौर पर एक बीएमडब्ल्यू कार ने रिंग रोड पर दिल्ली कैंटोनमेंट मेट्रो स्टेशन के पास सिंह की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी।

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न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग के समक्ष दाखिल 400 पन्नों के आरोप पत्र में पुलिस ने आरोप लगाया है कि आरोपी गगनप्रीत मक्कड़ ने पीड़ित को समय पर जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में जानबूझकर देरी की।

आरोप पत्र के अनुसार, यह दुर्घटना 14 सितंबर को अपराह्न करीब डेढ़ बजे हुई, जब मक्कड़ की बीएमडब्ल्यू एक्स-5 कथित तौर पर 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। कार रिंग रोड पर दिल्ली कैंटोनमेंट मेट्रो स्टेशन के पास एक मेट्रो पिलर से टकराकर पलट गई और फिर हरि नगर निवासी नवजोत सिंह की मोटरसाइकिल से जा टकराई।

आरोप पत्र में बीएमडब्ल्यू से प्राप्त गति विश्लेषण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है, ‘‘तेज रफ्तार के कारण वाहन पर नियंत्रण रखना असंभव हो गया था। बीएमडब्ल्यू बेहद मजबूत गाड़ी होती है और टक्कर भी बहुत भीषण थी। टक्कर के प्रभाव से ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीड़ितों को कितनी जोरदार चोट लगी होगी।’’

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए अंतिम रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मक्कड़ घायलों को 10 से 15 मिनट की दूरी पर स्थित पास के अस्पतालों जैसे दिल्ली कैंटोनमेंट अस्पताल या एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) ट्रॉमा सेंटर ले जाने के बजाय दुर्घटनास्थल से लगभग 20 किलोमीटर दूर जीटीबी नगर स्थित न्यूलाइफ अस्पताल ले गया। उन्हें अस्पताल पहुंचने में 23 मिनट लग गए और इस देरी के कारण वो कीमती समय बर्बाद हो गया जिसमें पीड़ित की जान बचाई जा सकती थी।

भाषा सुरभि नरेश

नरेश


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