लोस में विपक्ष विधेयक का विरोध नहीं करता तो उत्तराखंड विधानसभा की 35 सीट पर महिला आरक्षण होता:धामी

लोस में विपक्ष विधेयक का विरोध नहीं करता तो उत्तराखंड विधानसभा की 35 सीट पर महिला आरक्षण होता:धामी

लोस में विपक्ष विधेयक का विरोध नहीं करता तो उत्तराखंड विधानसभा की 35 सीट पर महिला आरक्षण होता:धामी
Modified Date: April 28, 2026 / 05:18 pm IST
Published Date: April 28, 2026 5:18 pm IST

देहरादून, 27 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन संविधान संशोधन विधेयक’ पारित न होने देने के लिए विपक्ष की आलोचना की और कहा कि अगर यह पारित हो जाता तो परिसीमन के बाद राज्य विधानसभा में 35 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो जातीं।

धामी ने कहा कि विधेयक के पास होने पर कुल सीटों की संख्या बढ़ जाती जिससे हर राजनीतिक दल का फायदा होता।

‘नारी सम्मान-लोकतंत्र में अधिकार’ पर चर्चा के लिए बुलाए गए राज्य विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर लोकसभा में यह विधेयक पारित हो जाता तो परिसीमन के बाद उत्तराखंड विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 105 हो सकती थी, जिनमें से 35 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती थीं।

उन्होंने कहा कि इसी तरह लोकसभा सांसदों की संख्या भी पांच से बढ़कर सात या आठ हो जाती ।

धामी ने कहा कि इसमें हर राजनीतिक दल को फायदा था, लेकिन विपक्ष ने इस विधेयक को पारित नहीं होने दिया।

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को डर है कि यदि सामान्य घरों से महिलाएं राजनीति में आ जाएंगी तो कुछ दलों की वंशवादी राजनीति की दुकानें बंद हो जाएंगी।

सनातन संस्कृति में नारी को देवी माने जाने तथा भारत में रानी लक्ष्मीबाई से लेकर अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला तक के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी अब केवल ‘सहभागिता’ तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘नेतृत्व’ की भूमिका भी निभा रही है।

उन्होंने कहा कि नारी शक्ति के सामर्थ्य को समझते हुए ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं को आरक्षण देने के विराट संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग और समर्थन का आह्वान किया था ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी कड़ी में 2029 में अगले लोकसभा चुनावों तक देश की आधी आबादी को उसका पूरा अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस ऐतिहासिक संकल्प को साकार करने की दिशा में निर्णायक प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने मिलकर इस ऐतिहासिक और युगांतकारी पहल को संसद में पारित नहीं होने दिया।

मुख्यमंत्री ने विधेयक के लोकसभा में गिरने के बाद कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा तालियां बजाकर जश्न मनाने का जिक्र किया तथा कहा कि उस दृश्य को देखकर महाभारत की वह सभा याद आ गई, जिसमें द्रौपदी का अपमान किया गया था। उन्होंने विपक्ष के नेताओं के व्यवहार की तुलना ‘रावण के अहंकार’ से भी की।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा यह भरोसा दिलाया गया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य की सीटों के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा जबकि प्रधानमंत्री भी विधेयक को पारित कराने का श्नेय विपक्ष को देने को तैयार थे, लेकिन उसके बावजूद उसे गिरा दिया गया ।

धामी ने विपक्ष के इस रवैये की घोर निंदा की तथा कहा कि देश की महिलाएं पूरी तरह से समझ चुकी हैं कि कौन उनके अधिकारों के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहा है ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुसलमान महिलाओं को इस कुप्रथा से कानूनी संरक्षण प्रदान करने का काम किया जबकि विपक्ष की पूर्ववर्ती सरकारों ने इस विषय पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय तक बदलने का काम किया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में सर्वप्रथम “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया जिससे प्रदेश की मुस्लिम महिलाओं को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दलगत हितों से ऊपर उठकर सकारात्मक और स्पष्ट रुख अपनाया जाए, ताकि देश की आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिल सके।

राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने संशोधन विधेयक की तकनीकी व्यवहार्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा का नारी शक्ति वंदन संविधान संशोधन विधेयक के जरिए 2029 से महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने का दावा भ्रामक है क्योंकि यह विधेयक जनगणना और परिसीमन से जुड़ा हुआ है ।

आर्य ने कहा कि 2026 में शुरू हुई जनगणना 2027 तक पूरी होगी और अंतिम आंकड़ों के प्रकाशन में कम से कम दो साल और लगेंगे।

उन्होंने कहा कि इसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया में भी छह साल का समय लगेगा। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का वास्तविक क्रियान्वयन 2034 से पहले संभव ही नहीं है।

कांग्रेस सदस्य ने कहा कि यह मुददा भाजपा का अपनी “राजनीतिक जमीन बचाने” का एक रणनीतिक प्रयास है ।

भाषा दीप्ति संतोष

संतोष


लेखक के बारे में